07-Jun-2020

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प्रदेश की डिस्टलरीज द्वारा निर्मित सेनेटाइजर की दरें निर्धारित

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प्रदेश में समस्त खेल गतिविधियां 30 अप्रैल तक स्थगित
लॉक डाउन के दौरान ई-मेल, ई-ऑफिस मान्य
आदिवासी महिलाएं ग्रामीणों, वनकर्मियों के लिये बना रहीं "होम मेड मास्क"


भोपाल : शुक्रवार, अप्रैल 3, 2020, आबकारी आयुक्त श्री राजेश बहुगुणा ने प्रदेश की सभी डिस्टलरीज को सेनेटाइजर की बोतलों में विक्रय मूल्य अंकित करने के निर्देश दिये। उन्होंने अपेक्षा की है कि प्रदेश में कोरोना वायरस इस राष्ट्रीय आपदा के मद्देनजर 180 एमएल की 50 बोतलों की पेटी की शासकीय आपूर्ति के लिये जीएसटी सहित कीमत 1800 रूपये और गैर शासकीय आपूर्ति/विक्रय के लिये अधिकतम 2100 रूपये से अधिक नहीं रखें।

श्री बहुगुणा ने कहा है कि 180 एमएल की प्रत्येक बोतल में एमआरपी जीएसटी सहित 60 रूपये से अधिक और 90 एमएल की बोतल में 30 रूपये से अधिक अंकित नहीं करें। इससे विक्रेताओं को राष्ट्रीय आपदा के समय अनुचित लाभ लेने से रोका जा सकेगा। यदि 180 एमएल की बोतलों की अधिक मात्रा जैसे 5, 10, 20 लीटर आदि में यह आपूर्ति शासकीय संस्थाओं में की जाती है, तो 175 रूपये प्रति बल्क लीटर और गैर शासकीय संस्थाओं को 190 रूपये प्रति बल्क लीटर जीएसटी सहित आपूर्ति की जाये।

प्रदेश की डिस्टलरियों में निर्मित सेनेटाइजर को संभागीय आयुक्त/जिला कलेक्टर के नियंत्रण में आबकारी विभाग के डिपो में रखा गया है। संभागीय आयुक्त इच्छानुसार इसे जिला मुख्यालयों पर स्थित जिला डिपो में संग्रहित करवा सकते हैं। शासकीय जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में सेनेटाइजर उपलब्ध होने पर इसे मेडिकल स्टोर/विक्रय स्थलों पर ड्रग निरीक्षक के माध्यम से आमजन को विक्रय के लिये उपलब्ध करवा सकते हैं। ऐसे विक्रय स्थलों पर आवश्यक रूप से बाहर एक नोटिस बोर्ड पर यह प्रदर्शित किया जाना चाहिए कि दुकान में कितना सेनेटाइजर उपलब्ध है और उपभोक्ता के लिये इसके विक्रय मूल्य क्या है।

श्री बहुगुणा ने कहा है कि 20 सेकेण्ड तक साबुन से हाथ धोने पर वही प्रभाव होता है, जो सेनेटाइजर के उपयोग से होता है। उन्होंने कहा है कि शासकीय डिपो में सेनेटाइजर का पर्याप्त स्टॉक है तो डिस्टलरी के संचालक संभागीय आयुक्त से अनापत्ति प्राप्त कर खुले बाजार में भी इसे बेच सकते हैं। उन्होंने सभी संभागीय आयुक्त और कलेक्टर्स को प्रदेश के डिस्टलरीज द्वारा निर्मित सेनेटाइजर के मूल्य एवं विक्रय/वितरण की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिये।

प्रदेश में समस्त खेल गतिविधियां 30 अप्रैल तक स्थगित

विश्वव्यापी नोबेल कोरोना ( Covid-19) वायरस संक्रमण के संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए संचालक खेल और युवा कल्याण श्री व्ही. के. सिंह ने प्रदेश के सभी स्टेडियमों/मैदानों पर संचालित खेल गतिविधियां, प्रशिक्षण एवं अन्य प्रतियोगिताओं को 30 अप्रैल, 2020 तक के लिए स्थगित कर दिया है। इस बारे में समस्त संभागीय/जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी तथा प्रभारी, राज्य खेल अकादमी को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक कोरोना ( Covid-19) महामारी के संक्रमण को रोकने के संबंध में भारत सरकार एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार सोशल डिस्टेन्सिंग के पालन को कड़ाई से लागू करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। उल्लेखनीय है कि  पूर्व में खेल गतिविधियों को स्थगित करने के संबंध में यह अवधि 31 मार्च, 2020 निर्धारित की गई थी।

लॉक डाउन के दौरान ई-मेल, ई-ऑफिस मान्य

राज्य शासन ने निर्देश जारी किये हैं कि ई-मेल, ई-आफिस और (NIC) से जारी आदेश, पत्राचार, स्वीकृति एवं पत्राचार को मान्य किया जाये। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक समस्त कार्यालय 14 अप्रैल तक लॉक डाउन होने के कारण 15 अप्रैल, 2020 तक सक्षम अधिकारी द्वारा ऑफिशियल ई-मेल, ई-ऑफिस (NIC) से जारी आदेश/पत्राचार/ स्वीकृति को भौतिक आदेश/स्वीकृति/पत्राचार के समान मान्य होंगे।

आदिवासी महिलाएं ग्रामीणों, वनकर्मियों के लिये बना रहीं "होम मेड मास्क"

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा अनुरूप वन विभाग ने नोवेल कोरोना वाइरस के संक्रमण के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में लोगों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता के लिये ग्रीन इंडिया मिशन अंतर्गत नई पहल की है। वनमंडल उत्तर बैतूल के परिक्षेत्र भौंरा में सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त आदिवासी महिलाओं के 'अरण्य स्व-सहायता समूह' द्वारा वन विभाग के सहयोग से भारत सरकार की गाइडलाइन अनुसार कॉटन के कपड़े से मास्क निर्माण का कार्य किया जा रहा है।

यह मासस्क 'होम मेड मास्क' की श्रेणी में आता है, जो कोरोना वाइरस के संक्रमण को रोकने में 70 प्रतिशत तक सफल है। इसे धोने के बाद कई बार उपयोग किया जा सकता है। इस मास्क को अल्ट्रा वायलेट लाइट तकनीकी से संक्रमित रहित (सेनिटाईज) किया जा रहा है। समूह द्वारा 10 हजार मास्क निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। समूह द्वारा पिछले 24 मार्च से 2 अप्रैल तक 5000 मास्क निर्माण किए जाकर वितरित किए जा चुके हैं। यह मास्क 8 रूपये की दर पर स्थानीय ग्रामीणों को प्रदाय किया जा रहा है।

होम मेड मास्क प्राथमिकता के आधार पर वन अमले, वन सुरक्षा में लगे सुरक्षा श्रमिक तथा ऐसे ग्रामीणों, जो ग्राम से बाहर किसी कार्य से गए थे एवं वापस लौटे हैं एवं ऐसे व्यक्ति, जिन्हें आकस्मिक कार्य से बाहर जाना पड़ता है और मास्क क्रय करने में समर्थ नहीं है, उन्हें विभाग की संयुक्त वन प्रबंध समितियों के माध्यम से नि:शुल्क वितरित किए जा रहे हैं। इस काम में वन कर्मचारी एवं वन समितियाँ सक्रियता से भाग ले रही हैं। मास्क वितरण का काम सभी वन परिक्षेत्रों में किया जा रहा है। वन समितियों में मास्क वितरण के साथ-साथ हाथ धोने के लिये साबुन भी प्रदाय किया जा रहा है। ग्रामीणों को समय-समय पर हाथ धोने एवं मास्क को पुन: उपयोग के पूर्व साबुन से गरम पानी में धोकर पाँच घंटे तेज धूप में सुखाने की समझाइश भी दी जा रही है।

मास्क के लिये सामग्री की निरंतर उपलब्धता के संबंध में स्थानीय अधिकारी स्थानीय प्रशासन के सम्पर्क में हैं। समूह प्रति दिन लगभग 1000 मास्क निर्माण करने का क्षमता रखता है। मास्क निर्माण के माध्यम से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार के साथ-साथ राष्ट्र को इस कठिन परिस्थिति में अपना बहुमूल्य योगदान देने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

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