02-Apr-2020

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शिवराज ने पोषण आहार पर जमकर झूठ परोसा, राज्य सरकार पर बगैर तथ्य व प्रमाण के झूठे आरोप लगाए: सलूजा

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भोपाल, 17 फरवरी 2020, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा पोषण आहार व्यवस्था को लेकर कांग्रेस सरकार पर लगाए गए तमाम आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि पोषण आहार व्यवस्था में निजी कंपनियों या ठेकेदारों की भूमिका को खत्म करने की मुख्यमंत्री कमलनाथ की घोषणा का स्वागत करने की बजाय, इस व्यवस्था को वर्षों तक पोषित करने वाले शिवराज ने, हमेशा की तरह एक बार फिर इस मुद्दे पर भी जमकर झूठ परोसा है, बगैर तथ्य व प्रमाण के तमाम झूठे आरोप लगाए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह झूठे आरोप लगा रहे हैं कि उनके समय सभी प्लांट चालू हो गए थे, जबकि सच्चाई यह है कि पांच प्लांट कांग्रेस सरकार के समय 2019 में शुरू हुए है और दो तो अभी तक शुरू नहीं हो पाये है। देवास संयंत्र में मार्च 19 से, धार में जुलाई 2019 से, होशंगाबाद में जुलाई 2019 से, मंडला में अक्टूबर 2019 से व सागर में अक्टूबर 2019 से वर्तमान कांग्रेस सरकार द्वारा संयंत्र प्रारंभ कराए जाकर पोषण आहार का उत्पादन एवं वितरण का कार्य प्रारंभ कराया गया।वर्तमान में पोषण आहार उत्पादन की प्रक्रिया पूर्णतः स्वयं सहायता समूह के परिसंघो द्वारा पांच प्लांटों में संचालित की जा रही है और इसमें कोई निजी करण नहीं किया गया है। शेष दो प्लांटों में भी शीघ्र ही उत्पादन कार्य प्रारंभ किया जाना है।
सलूजा ने शिवराज के एक अन्य आरोप पर जवाब देते हुए कहा कि सामान्यतः यह परंपरा रही है कि मंत्रिपरिषद के निर्णयो का मुख्य सचिव से विभागों को लिखित संप्रेषण होने के बाद ही आदेश जारी होते हैं। उन्होंने टेक होम राशन व्यवस्था पर शिवराज सिंह जी से कुछ प्रश्न पूछ उनका जवाब माँगा हैं।
सवाल - 
1. प्रदेश में पिछले 15 वर्ष भाजपा की सरकार रही है। टेक होम राशन व्यवस्था को लेकर तमाम आरोप लगाने वाले शिवराज जी बताये कि वे प्रदेश के 13 वर्ष मुख्यमंत्री रहे है, उन्होंने टेक होम राशन सप्लाई मैं निजी कंपनियों की भागीदारी को समाप्त करने के लिए क्या-क्या कदम उठायें?
2. आप 13 मार्च 2018 की जिस केबिनेट बैठक का जिक्र कर रहे है ,जिसमें निर्णय लिया गया कि टेक होम राशन का कार्य महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से किया जाएगा। क्या यह सही है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट की डाँट-फटकार के बाद लिया गया, इसमें आपकी सरकार की कोई भूमिका नहीं थी?
3. क्या कारण रहा कि मार्च 2018 में निर्णय होने के बाद भी आप की सरकार के शेष बचे कार्यकाल में भी टेक होम राशन में निजी कंपनियों की भागीदारी का कार्य सतत जारी रहा?
4. क्या आप की सरकार में वित्त और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विकास विभाग पोषण आहार के निजी करण से सहमत थे?
5. आपकी सरकार के समय क्या यह भ्रष्टाचार के नापाक गठबंधन के तहत निरंतर चालू रहा?
6. स्वयं सहायता समूह को टेक होम राशन का काम देने की सद्बुद्धि आपको अपने 13 वर्ष के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में ही क्यों पैदा हुई और वह भी सुप्रीम कोर्ट की डांट फटकार के बाद?
7. पूर्व मुख्यमंत्री जी यह भी बताएं कि उनकी सरकार में कितनी बार किसी विभाग के प्रमुख सचिव ने बिना कैबिनेट निर्णय के औपचारिक रूप से लिखित स्वीकृति आदेश से बिना प्रोसिडिंग जारी हुए, उसी दिन आदेश अपनी ओर से जारी किये और कितनी बार ऐसे अधिकारी के निर्णय का आपने समर्थन व सम्मान किया?
8. क्या कारण रहा कि आपकी 15 वर्ष की सरकार में निरंतर मध्यप्रदेश कुपोषण में देश में सदैव शीर्ष पर रहा? आपने कुपोषण दूर करने के लिए 15 वर्ष की सरकार में क्या-क्या कदम उठाये? पोषण आहार व्यवस्था में बदलाव के लिए क्या-क्या निर्णय लिए व क्या कदम उठाये, यह भी सार्वजनिक करें? शिवराज जी पहले इन प्रश्नो का जवाब दीजिये, फिर झूठे आरोप लगाये। आपको तो पोषण आहार व्यवस्था पर बोलने तक का हक नहीं है।

भाजपा  नेता और प्रदेश को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह जबाव दें:-
1. क्या यह सही नहीं है कि आपके कार्यकाल में 42.8 प्रतिशत अर्थात 45 लाख बच्चे  कुपोषण का शिकार थे।
2. क्या यह सही नहीं है कि आपके कार्यकाल के दौरान 13 लाख 50 हजार कुपोषित बच्चे मौत की आगोश में समा गये। 
3. क्या यह सही नहीं है कि एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यक्रम के तहत आपकी सरकार द्वारा वर्ष 2007-08 से लगातार उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन किया जाता रहा।
4. क्या यह सही नहीं कि वर्ष 2004 में ही उच्चतम न्यायालय ने पोषण आहार की योजना में ठेकेदारों को बाहर करने के आदेश दिये थे, उसके बावजूद भी आप निजी कंपनियों और ठेकेदारों के साथ सांठगांठ करते रहे। 
5. क्या यह सही नहीं है कि वर्ष 2009 और 2015 में नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने लिखा था कि 30 से 32 प्रतिशत पोषण आहर का पैसा जो बच्चों के हक का है वह निजी कंपनियां खा रही हैं। उसके बावजूद आप निजी कंपनियों के साथ सांठगांठ करते रहे। 
6. क्या यह सही नहीं है कि आपके कार्यकाल में पोषण आहार कार्यक्रम के लिए बने संयुक्त उपक्रमों में एमपी एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट काॅर्पोशन की पूंजीगत हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत रह गई और संयुक्त उपक्रम निजी उपक्रम रह गये।
7. क्या उच्च न्यायालय द्वारा आपकी सरकार के खिलाफ दिया हुआ आदेश आपको शर्मसार नहीं करता।
9 मार्च 2018 को माननीय उच्च न्यायालय ने  (Review Petition No. 1445/2017) अपने आदेश में लिखा था कि "Inspite there being a categoric direction] it appears that the State Government wanted to favour those private persons who were in joint venture supplying THR to the State Government, on same pretext or the other, the order dated 13-09-2017 passed by this court was not complied with.   
8. क्या यह सही नहीं है कि वर्ष 2016 में जुलाई-अगस्त में श्योपुर में 116 बच्चों की कुपोषण के कारण मृत्यु हुई और यह पाया गया कि वहां पोषण आहार नहीं पहुँच रहा था. उसी वक्त आयकर विभाग ने एम् पी एग्रो इंडसट्रीज डेवलपमेंट कारपोरेशन और पोषण आहार की आपूर्ति में शामिल तीनों कम्पनियों पर छापे मारे और पाया कि वे अनियंत्रित आय अर्जित करते रहे हैं. तब भी आपकी सरकार ने उन कंपनियों पर कोई कार्यवाही नहीं की, 10 वर्षों में शिवराज सिंह जी आपकी सरकार ने निजी कंपनियों को 7800 करोड़ रूपए के ठेके दिए, जिनमें से इन कंपनियों और आपकी सरकार की सांठगांठ ने 30 से 32 प्रतिशत तक बच्चों के पोषण आहार पर डाका नहीं डाला। 
9. क्या यह सही नहीं है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने पाया कि शिवराज सिंह सरकार के दौरान दस सालों से लगातार पोषण आहार घोटाला संचालित हो रहा है. तब माननीय उच्च न्यायालय ने 13 सितम्बर 2017 को आदेश (रिट पिटीशन 996/2016) दिया कि मध्यप्रदेश सरकार 30 दिन के भीतर इन कंपनियों से काम वापस लेकर नई नीति बनाए. किन्तु नवम्बर 2018 तक सरकार में रहते हुए शिवराज जी इन कंपनियों को ठेके में बनाए रखते गए। 
10. क्या यह सही नहीं है कि आपकी सरकार ने बच्चों के पोषण आहार पर भीषणतम भ्रष्टाचार कर प्रदेश के भविष्य को उजाड़ने की कोशिश की है।
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