19-Jun-2019

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सूचना आयुक्‍तों की नियुक्तियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने जताई आपत्ति

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नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राज्यपाल से की मांग सरकार के प्रस्ताव को ठुकराएं
राजकाज न्‍यूज, भोपाल
लम्‍बे समय से रिक्‍त पड़े राज्‍य सूचना आयुक्‍तों के पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा कर राज्‍यपाल की ओर भेजने के बाद नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राज्‍यपाल से अनुरोध किया है कि राज्‍य सरकार के प्रस्‍ताव को ठुकराएं। यहीं नहीं नेता प्रतिपक्ष ने इसे गलत तरीके से की गई नियुक्तियां बताते हुए इसके लिए मुख्यमंत्री को तलब करने की मांग भी राज्‍यपाल से की है।
गौरतलब है कि राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से रिक्त सूचना आयुक्त के पदों को भरने का राज्‍य सरकार ने निर्णय नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की असहमति के बावजूद लेकर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से पांच सूचना आयुक्त नियुक्त करने की अनुशंसा की। जिन पांच नामों की अनुशंसा की गयी हैं, उनमें सेवानिवृत्त डी जी पी सुरेंद्र सिंह, पूर्व आईएएस अरुण पांडे, आरके माथुर और डीपी अहिरवार के साथ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी के नाम शामिल हैं। आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और दस सूचना आयुक्त के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां कभी भी पांच सूचना आयुक्त से ज्यादा नहीं रहे। आयोग में वर्तमान में मुख्य सूचना आयुक्त केडी खान और दो सूचना आयुक्त सुखराज सिंह व आत्मदीप हैं।

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को अवैधानिक और मनमाना बताया है। सिंह ने कहा कि भाई-भतीजों और संघ के लोगों को उपकृत करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और केंद्रीय सूचना आयोग की चयन प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए सूचना के अधिकार की मूल मंशा और उद्दश्यों को ही नष्ट कर दिया है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि वे न केवल सरकार के प्रस्ताव को ठुकराएं बल्कि गलत तरीके से की गई नियुक्तियों के लिए मुख्यमंत्री को तलब भी करें। 
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने नियमों को दरकिनार कर संघ से जुड़े लोगों, मंत्रियों के रिश्तेदारों, दागियों और मुख्यमंत्री की चाटुकारिता करने वाले लोगों को सूचना आयुक्त पर नियुक्ति बताती है कि शिवराज सिंह चैहान को न संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान है और न ही उनके प्रति कोई सम्मान है। सिंह ने मुख्यमंत्री पर हिटलर शाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके द्वारा इस संबंध में मुख्यमंत्री सहित राज्य सरकार को 6 बार पत्र लिखे गए। इन पत्रों में उन्होंने लगातार चयन प्रक्रिया के तरीके पर सवाल उठाए और उसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश अनुसार करने को कहा लेकिन सरकार का अड़ियल रवैया यह बताता है कि उनकी दिलचस्पी सिर्फ इस बात पर थी कि अपने लोगों को किस प्रकार उपकृत किया जाए। अंतिम पत्र में मैंने यह सुझाव भी दिया था कि सूचना आयुक्त की नियुक्तियां चुनाव के बाद की जाएं। श्री सिंह ने कहा कि मेरे पत्रों का समाधान किए ही बगैर मुख्यमंत्री द्वारा पहले से ही तय किए गए नामों पर मोहर लगा दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को सूचना आयुक्त बनाया गया है उनके नाम पहले से ही जगजाहिर थे। श्री सिंह ने कहा कि सरकार की अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, घोटालों पर नजर रखने वाले सूचना आयोग में ही अगर व्यक्तिगत रुचियों, दागियों और विचारधारा विशेष आधारित नियुक्तियां होगीं तो फिर सूचना का अधिकार अधिनियम की मंशा ही नष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सरकार पर निगरानी रखने के लिए जनता को यह अधिकार दिया था ताकि भ्रष्टाचार में अंकुश लगने के साथ ही सरकार के काम-काज में पारदर्शिता रहे। 
सिंह ने राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल से मांग की है कि संवैधानिक प्रमुख होने के कारण वे मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार द्वारा संवैधानिक विभाग को नपुंसक बनाने का जो प्रयास किया जा रहा है उस पर शक्ति से अंकुश लगाएं। उन्होंने कहा कि अगर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक न लगी तो वे अदालत में इन नियुक्तियों को चुनौती देंगे।
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