02-Apr-2020

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एमपी: संविदा नियुक्ति देने से भी नहीं निकल रहा समाधान

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भोपाल। आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही राज्य सरकार सेवानिवृत्ति के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वत्व (सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ) देने की स्थिति में नहीं है। इसलिए कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देने पर विचार चल रहा है, लेकिन इससे भी समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है।

यदि सरकार सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देती है, तो भी उनके स्वत्वों का भुगतान करना पड़ेगा। यह राशि पांच हजार करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। क्योंकि सरकार को सेवानिवृत्ति पर 25 लाख रुपए और इससे अधिक राशि देनी हैं, जिसे देखते हुए सरकार दूसरे विकल्प तलाश रही है।

प्रदेश में मार्च से दिसंबर 2020 के बीच 12 हजार कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने का अनुमान है। इससे जहां सरकार को पांच हजार करोड़ से अधिक राशि स्वत्वों पर खर्च करनी पड़ेगी। वहीं कर्मचारियों की कमी से सरकारी कामकाज भी प्रभावित होगा।

इस स्थिति को देखते हुए संविदा नियुक्ति का विकल्प लाया गया था, लेकिन आला अधिकारियों का मानना है कि कर्मचारी इस विकल्प को नहीं चुनेंगे। क्योंकि स्वत्व रोककर संविदा नियुक्ति लेने में उन्हें कोई फायदा नहीं है। यह बात सामने आने के बाद सरकार नए विकल्प तलाश रही है। उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल 2016 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) अधिनियम 2002" खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट ने इसे यथास्थिति रखा है।

वरिष्ठ पद की जिम्मेदारी दे सकती है सरकार

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक राज्य सरकार पदोन्नति कर सकती है, लेकिन वरिष्ठ वेतनमान और क्रमोन्न्ति पाने वाले कर्मचारियों को उस पद की जिम्मेदारी तो सौंप सकती है। सरकार इस पर विचार कर रही है। प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं, जिन्हें वरिष्ठ पद की क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान दिया जा चुका है।

कर्मचारी भी तैयार नहीं

संविदा नियुक्ति के लिए कर्मचारी भी तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि संविदा नियुक्ति के बाद वैसे लाभ नहीं मिलेंगे, जो नियमित नौकरी में मिलते हैं। तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष एलएन कैलासिया बताते हैं कि संविदा नियुक्ति के बाद सालाना वेतनवृद्धि, टीए-डीए, सरकारी गाड़ी और सरकारी मकान का लाभ नहीं मिलेगा।

ऐसे में जो कर्मचारी सरकारी मकान में रह रहे हैं, उन्हें वह खाली करना पड़ेगा और अभी तक मिलने वाली गाड़ियां भी छोड़ना पड़ेंगी। फिर कोई क्यों संविदा नियुक्ति लेगा। वे बताते हैं कि सेवानिवृत्ति आयुसीमा बढ़ी तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पदोन्न्ति की उम्मीद भी रहेगी, संविदा में तो यह उम्मीद भी नहीं है।

साभार- नईदुनिया

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