12-Nov-2019

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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चुनाव आयोग ने मायावती एवं योगी के चुनाव प्रचार पर लगाई रोक

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राजकाज न्‍यूज, नई दिल्‍ली. बेलगाम बयानबाजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारत निर्वाचन आयोग को लगाई गयी फटकार के बाद चुनाव आयोग ने सख्‍ती बरती हैं। सोमवार को उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एवं पूर्व मुख्‍यमंत्री पर चुनाव प्रचार प्रतिबंध लगा दिया है। मायावती पर 72 घंटे और योगी आदित्‍य नाथ पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया गया हैं। आयोग के इस सख्‍त रवैये के बाद माना जा रहा है कि अब और कुछ नेताओं पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। खासकर आजम खान पर इस तरह की कार्रवाई की जा सकती है। माना जा रहा है कि आयोग के इस आदेश के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। आपको बता दें कि मायावती के बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बरतने के लिए चुनाव आयोग को फटकार लगाई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक रैली में कहा था कि कांग्रेस और गठबंधन दलों के लिए अली हैं तो बीजेपी के लिए बजरंग अली।

अपने भाषणों में आपत्तिजनक बयान देकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती को कल सुबह 6 बजे से शुरू होने वाले 72 घंटे और 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार से प्रतिबंधित कर दिया। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को भी फटकार लगाई थी। मायावती ने देवबंद में अपने भाषण के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को संदेश देते हुए कहा था कि कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं है, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली मंडल में मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है, सभी जगहों पर गठबंधन और बीजेपी के बीच ही लड़ाई है। बीजेपी और कांग्रेस चाहती हैं कि मुस्लिम वोटों में बंटवारा हो जाए। इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों से केवल गठबंधन को वोट करने की अपील की थी।

वहीं चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चुनाव आचार संहिता तोड़ने को लेकर वह नोटिस और एडवाइजरी जारी कर रहा है। वह न तो किसी को अयोग्य करार दे सकता है और न ही किसी पार्टी को डिरजिस्टर (अपंजीकृत) कर सकता है?

इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग अपनी ताकत जानता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह चुनावी अभियान में हेट स्पीच और सांप्रदायिक बयानबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग के अधिकारों की जांच करेगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि वे इस मामले की कल सुबह 10:30 बजे सुनवाई करेंगे और मंगलवार को चुनाव आयोग का कोई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मायावती के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए चुनाव आयोग से पूछा कि क्या उसे कोर्ट की शक्तियों के बारे में पता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग अब तक इस मामले में केवल एडवाइजरी और नोटिस जारी कर रहा है। नाराज कोर्ट ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही नहीं था। आगे सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मंगलवार को तलब किया है।

मायावती के बयान मामले में भारतीय जनता पार्टी ने भी चुनाव आयोग से शिकायत की थी। बीजेपी के प्रदेश चुनाव प्रबंधन प्रभारी जेपीएस राठौर ने चुनाव आयोग में बीएसपी प्रमुख मायावती के देवबंद रैली में दिए गए बयान की शिकायत की। राठौर ने प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखित शिकायत में कहा है कि मायावती की ओर से मुसलमानों से एक राजनीतिक दल को वोट न देने की अपील करना धार्मिक उन्माद फैलाने वाला है और निष्पक्ष चुनाव में बाधक और आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लघंन है। बीजेपी ने मांग की कि चुनाव आयोग कार्रवाई करे ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

गौरतलब है कि सहारनपुर के देवबंद में हुई एक रैली में गठबंधन के तीनों मुखिया शामिल हुए थे। इनमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह ने भी मंच से जनता को संबोधित किया। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा था कि कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं है, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली मंडल में मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है, सभी जगहों पर गठबंधन और बीजेपी के बीच ही लड़ाई है। बीजेपी और कांग्रेस चाहती हैं कि मुस्लिम मतों में बंटवारा हो जाए।


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