23-Jul-2019

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आज है माघ पूर्णिमा, जानिए क्या है माघ पूर्णिमा का महत्व

हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि माघ पूर्णिमा पर स्वंय भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करतें है अत: इस पावन समय गंगाजल का स्पर्श मात्र भी स्वर्ग की प्राप्ति देता है। इसके सन्दर्भ में यह भी कहा जाता है कि इस तिथि में भगवान नारायण क्षीर सागर में विराजते हैं तथा गंगा जी क्षीर सागर का ही रूप है।

धार्मिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा में स्नान करने से सूर्य और चन्द्रमा युक्त दोषों से मुक्ति प्राप्त होती है। यह महीना जप-तप व संयम का महीना माना गया है इस महीने तामसी प्रवृत्ति के लोग भी सात्विकता को अपना लेते हैं, ऋषि मुनियों ने भी माघ मास में मांस भक्षण को निषिद्व कहा है।

माघ पूर्णिमा का महत्व:-
हिन्दू धर्म पंचांग के ग्यारह-वें महीने ‘माघ’ में स्नान, दान, धर्म-कर्म का विशेष महत्व होता है इस महीने कि पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा मघा नक्षत्र में होता है जिस कारण इसे माघ कहा जाता है। माघ मास की पूर्णिमा की विशेषता है कि इसमें जहां-कहीं भी स्वच्छ जल हो, वह गंगाजल के समान गुणकारी हो जाता है।

जिन्हें प्रयाग, काशी, हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, नैमिषारण्य, मथुरा, अवंतिका (उज्जैन) आदि किसी तीर्थ में माघ-स्नान का सुअवसर प्राप्त होगा, वे निश्चय ही सौभाग्यशाली हैं। किंतु जो श्रद्धालु किन्ही कारणों से बाहर नहीं जा सकते, वे साफ जल को किसी बाल्टी में भरकर उसमें आंवले और तुलसीदल का चूर्ण मिला दें और उससे स्नान करें।

पुरातन मान्यता है कि गंगा में जहां कही भी स्नान किया जाए वे कुरुक्षेत्र के समान फल देने वाली हैं। जिनका चित्त पाप से दूषित है, ऐसे समस्त प्राणियों और मनुष्यों की गंगा के अलावा अन्यत्र कहीं दूसरा स्थान नहीं है। भगवान शंकर के मस्तक से निकली हुई गंगा सब पापों का हरण करने वाली शुभ फल देने वाली हैं। वे पापियों को भी पवित्र कर उनका उद्धार करने वाली हैं।

आपको बता दें कि पूर्णिमा में प्रात:स्नान, यथाशक्ति दान तथा सहस्त्र नाम अथवा किसी स्तोत्र द्वारा भगवान विष्णु की आराधना करने से यह अनुष्ठान पूरा होता है। यदि किसी कामना की पूर्ति के उद्देश्य से माघ-स्नान किया जाए, तो मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। निष्काम भाव से माघ-स्नान मोक्ष प्रदायक है। माघ-स्नान से समस्त पाप-ताप-शाप नष्ट हो जाते हैं। माघ-स्नान के व्रती स्त्री-पुरुष को नित्य कुछ न कुछ दान अवश्य करना चाहिए।

माघ पूर्णिमा में दान का महत्व:-
माघ मास की पूर्णिमा के दिन स्नान व व्रत रखने से विशेष पुण्य मिलता है ऐसा धर्मशास्त्रों में वर्णित है। सुबह नित्यकर्म एवं स्नान आदि से निपट कर भगवान विष्णु का विधिपूर्वक पूजन करें। फिर पितरों का श्राद्ध करें। गरीबों को भोजन तथा वस्त्र दान दें। तिल, कंबल, कपास, गुड़, घी, मोदक, जूते, फल, अन्न और यथाशक्ति सोना, चांदी आदि का दान भी दें तथा पूरे दिन का व्रत रखकर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और सत्संग एवं कथा कीर्तन में दिन-भर बिताकर दूसरे दिन पारण करें।

माघ शुक्ल पूर्णिमा को यदि शनि मेष राशि पर, गुरु और चंद्रमा सिंह राशि पर तथा सूर्य श्रवण नक्षत्र पर हों तो महामाघी पूर्णिमा का योग होता है। यह तिथि स्नान तथा दान के लिए अक्षय फलदायिनी होती है।

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