25-Jun-2018

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विमुद्रीकरण जैसे सकारात्मक कदम से बैंको की सेहत सुधरी

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टैक्सों की अदायगी में इजाफा, आधारभूत सुविधाओं के विकास की उम्मीदें बढ़ी- भदौरिया

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री अरविन्द भदौरिया ने कहा कि विमुद्रीकरण वास्तव में एक सकारात्मक निर्णय सिद्ध हुआ है, जिससे बैंको की सेहत सुधरी है। इससे जहां देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में संसाधन बढ़ेंगे, वहीं देश में गरीबी उन्मूलन के लिए स्थापित गरीब कल्याण कोष में प्रचुर धनराशि जुटेगी, जिससे पिछड़े हुए लोगों को समुन्नत करने का अवसर मिलेगा। बड़े नोटों के रूप में देश में 15.44 लाख करोड़ रू. करेंसी में प्रचलित थे, विमुद्रीकरण के रूप में 13 लाख करोड़ रू. बैंको में वापस जमा हो चुके है। अनुमान है कि ढ़ाई लाख करोड़ रू. की राशि बैंको तक पहुंचने वाली नहीं है। केन्द्र सरकार इतने भुगतान की जिम्मेदारी से मुक्त होगी। गरीब कल्याण के लिए अवसर और संसाधन बढ़ेंगे।

भदौरिया ने कहा कि विमुद्रीकरण का पहला निशाना भ्रष्टाचार पर सध चुका है। कालेधन के विरूद्ध संघर्ष और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाये जाने से जो असर परिलक्षित हुआ है, उसीका नतीजा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के धुर आलोचक श्री नीतिश कुमार जैसे परिपक्व नेता विमुद्रीकरण की लड़ाई में प्रधानमंत्री के हमसफर बन गये है और खुलकर समर्थन कर रहे है। देश-विदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस साहसिक निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।

उन्होनें कहा कि आर्थिक मुद्रा सुधार के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केशलैस इकोनोमी पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है, इसकी भाजपा शासित राज्यों में पूरी तैयारी आरंभ हो चुकी है। इससे नोटों के प्रचलन पर ध्यान देने के बजाय जनता का ध्यान डेबिट, क्रेडिट, मास्टर कार्ड पर केन्द्रित हो जायेगा। मुद्रा प्रचलन में नोटों की आवश्यकता यदि समाप्त हो गयी तो अरबों रू. जो नोट छापने पर खर्च किये जाते है, उसकी बचत होगी।

युवा मोर्चा सुखद-बदलाव का उत्प्रेरक साबित होगा- पांडे

भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री अभिलाष पांडे ने कहा कि सोलहवीं लोकसभा के प्रथम सत्र में राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने भरोसा दिलाया था कि गरीबी के अभिशाप से मुक्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। देश में आर्थिक सुधारों की दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जो प्रयास किये है, वह भारत की सार्वभौमिक और संप्रभुता के इकबाल से तैयार रोशनायी से लिखी है। जीएसटी और उसके बाद विमुद्रीकरण इसके प्रमाण है। आने वाले दिनों में देश को ‘‘केशलैस इकोनोमी’’ मे बदलना उनका सपना है। कालेधन पर प्रहार और भ्रष्टाचार के विरूद्ध मुहिम इसी का हिस्सा है। इससे बिचैलियों को समाप्त करनें में सफलता मिलेगी। भ्रष्टाचार की जड़ों पर कुठाराघात होगा।

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