18-Sep-2018

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उज्जैन में 276 वर्ष पूर्व हुआ था महाकालेश्वर मंदिर का नव-निर्माण

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सर्वमान्य सत्य है कि भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयंभू आवेष्टित है। इस विषय पर इतिहासकारों में मतभेद हो सकते हैं कि ज्योतिर्लिंग का पृथ्वी पर कब आगमन हुआ, मगर इस विषय पर इतिहासकारों में मतभेद नहीं हो सकते कि आज के महाकालेश्वर मंदिर का नव-निर्माण 276 वर्ष पूर्व राणोजी शिंदे (सिंधिया) के दीवान बाबा रामचन्द्र शेणवी ने करवाया।

महाकालेश्वर मंदिर के नव-निर्माण का श्रेय श्री रामचन्द्र शेणवी मल्हार सुखण्णकर को जाता है। वे कोंकण क्षेत्र के अरवली गाँव के सारस्वत गौड़ ब्राह्मण थे। रामचन्द्र शेणवी पेशवा की अश्वारोही सेना में थे। दिल्ली आक्रमण के समय बालाजी विश्वनाथ के साथ उनकी निष्ठा और सेवा के कारण पेशवा ने उन्हें वर्ष 1725 में जुन्नर की मजूमदारी और अक्टूबर वर्ष 1726 में मालवा की सरदेशमुखी दी। इसी दौरान वे राणोजी शिंदे के सम्पर्क में आये। पेशवा ने राणोजी शिंदे के माध्यम से मालवा पर आधिपत्य करने के बाद रामचन्द्र मल्हार को उज्जयिनी में ही रहने दिया। वर्ष 1739 में नवीन संरचना वाला महाकालेश्वर का वर्तमान भव्य मंदिर बाबा रामचंद्र शेणवी के प्रयासों का ही परिणाम है। महाकालेश्वर मंदिर की वर्तमान संरचना मूल मंदिर के निर्माण पर ही स्थित की गयी है।

इतिहासकारों के अनुसार सल्तनत काल में उज्जयिनी पर हुए आक्रमण में महाकालेश्वर मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थल को क्षति हुई थी। इसके बाद लम्बे समय तक महाकालेश्वर मंदिर का कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। मगर सन् 1720 में बाजीराव पेशवा (प्रथम) ने मालवा क्षेत्र सहित उत्तर भारत की ओर विजय के कदम बढ़ाये। सन् 1724 में मराठों ने उज्जयिनी और मालवा क्षेत्र के अधिकांश भाग पर आधिपत्य कर लिया। इन विजित प्रदेशों का विभाजन करते समय पेशवा ने उज्जयिनी का आधिपत्य राणोजी शिंदे को प्रदान किया था।

उज्जैन में स्थायी प्रवृत्ति के 2591 करोड़ के कार्य

उज्जयिनी में प्रत्येक 12 वर्ष में सिंहस्थ का आयोजन होता है। प्रत्येक 12 वर्ष में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर राज्य शासन सभी आयोजन में निर्माण कार्य करवाता रहा है। वर्ष 2004 में आयोजित सिंहस्थ की तैयारियों पर राज्य शासन ने 362 करोड़ रुपये खर्च किये थे। राज्य सरकार वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ को लेकर पिछले काफी वर्ष से तैयारी कर रही है। इस सिंहस्थ में राज्य सरकार ने उज्जैन में स्थायी प्रवृत्ति के करीब 2591 करोड़ रुपये के कार्य करवाये हैं। उज्जैन में करीब 100 नई सड़क और 4 फोर-लेन रोड बनवायी जा चुकी हैं। उज्जैन नगर को 14 नये पुल से सँवारा गया है। सिंहस्थ मद से 93 करोड़ 11 लाख की लागत से 400 बिस्तर और 1800 आउटडोर पेशेंट की क्षमता का अस्पताल बनाया जा रहा है।

महाकाल मंदिर परिसर में अनेक निर्माण कार्य किये जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से 4 करोड़ 75 लाख की लागत से विजिटर्स फेसिलिटी सेंटर, 2 करोड़ 75 लाख की लागत से महाकाल टनल, एक करोड़ 25 लाख की लागत से निर्गम-द्वार और 2 करोड़ 50 लाख की लागत से नंदी हॉल का नव-निर्माण हो रहा है। इससे पूर्व कभी भी इतनी बड़ी राशि महाकालेश्वर मंदिर परिसर के निर्माण पर खर्च नहीं की गयी।

उज्जैन में भेजेंगे निर्मल क्षिप्रा, देवास में कलेक्टर ने चलाया क्षिप्रा नदी सफाई अभियान

देवास में आज जन-भागीदारी से ग्राम क्षिप्रा में क्षिप्रा नदी एवं घाटों का सफाई अभियान शुरू हुआ। सफाई अभियान को 6 सेक्टर में विभाजित किया गया है। हर सेक्टर की एक मानक दूरी तय की गयी थी, जिसमें आज जनपद पंचायत देवास, जिला होमगार्ड, एनसीसी सहित अन्य समूह ने उत्साह से नदी और घाटों की सफाई की। कलेक्टर ने जन-भागीदारी के साथ नदी से पॉलिथीन, हार-फूल, लकड़ियाँ, अन्य बेकार सामग्री को नदी से बाहर फेंका।

देवास कलेक्टर श्री आशुतोष अवस्थी ने नागरिकों से कहा कि यह गौरव की बात है कि पुण्य-सलिला क्षिप्रा नदी हमारे जिले की भूमि से होकर निकली है, लेकिन आज इसमें गंदगी होने से यह दूषित हो रही है। हमें इसको साफ-स्वच्छ रखना है। हम इसे निर्मल बनाकर उज्जैन सिंहस्थ में भेजेंगे। देशभर के करोड़ों श्रद्धालु और साधु-संत निर्मल जल में स्नान करेंगे तो उसका कुछ अंश पुण्य देवासवासियों को प्राप्त होगा।

कलेक्टर ने सफाई के बाद क्षिप्रा नदी में 2000 से अधिक मछलियों को छोड़ा। कलेक्टर ने उपस्थित नागरिकों को स्वच्छता की शपथ भी दिलवायी। उन्होंने कहा कि नदी के किनारे साइन-बोर्ड लगाकर जन-सामान्य में स्वच्छता के प्रति सजगता बढ़ाई जायेगी। सफाई अभियान में स्थानीय जन-प्रतिनिधि, स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएँ और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

सिंहस्थ के मद्देनज़र अखाड़ों में किये जा रहे हैं व्यापक निर्माण कार्य

उज्जैन में वर्ष 2016 के सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन स्थित अखाड़ों के लिये व्यापक निर्माण कार्य हाथ में लिये गये हैं। अखाड़ों की आवश्यकता का आकलन करते हुए मेला प्रशासन द्वारा अखाड़ा परिसरों में कार्य स्वीकृत किये गये हैं। यह निर्माण कार्य आगामी दिनों में अखाड़ों को नया स्वरूप प्रदान करेंगे।

विभिन्न अखाड़ों में उनकी जरूरतों के मुताबिक बैठक-कक्ष, भोजन-शाला, टॉयलेट्स, पहुँच मार्ग से लेकर विद्युतीकरण के कार्य इन दिनों चल रहे हैं। इन सभी कार्य को पूरा करने के लिये समय-सीमा तय की गयी है। मेला कार्यालय में पिछले दिनों दिगम्बर अणि अखाड़े, निर्मोही अखाड़े और श्री पंचअग्नि अखाड़े में चल रहे कार्यों की समीक्षा की गयी।

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