21-Nov-2018

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पंचक्रोशी यात्रियों का सत्कार चाय-नाश्ता से

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शिक्षा मंत्री पारस जैन ने यात्रियों को पोहे खिलाये

स्कूल शिक्षा पारस जैन ने पंचक्रोशी यात्रा पूरी कर उज्जैन में प्रवेश करने वालों का सत्कार किया। उन्होंने यात्रियों को पोहे, सेव-परमल वितरित किये। शिक्षा मंत्री जैन ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक थैली का उपयोग न करने के संदेश की मंशा से कपड़े की थैलियाँ यात्रियों को नि:शुल्क वितरित की।

शिक्षा मंत्री पारस जैन ने सुबह से नाश्ते में पोहे का वितरण यात्रियों को किया। इसी प्रकार पंचक्रोशी मार्ग पर विभिन्न संगठनों के द्वारा अलग-अलग यात्रियों के सत्कार में ठण्डा, साग-पुड़ी, चाय-बिस्किट, छाछ आदि का नि:शुल्क वितरण किया। शिक्षा मंत्री 5 मई को भी नाश्ते का नि:शुल्क वितरण करेंगे। श्री शेखमुस्तफा भाई यात्रियों के नाश्ते के लिये पाँच क्विंटल पोहा नि:शुल्क देंगे।

पुत्र की दीर्घायु हेतु जलेबी चढाते हैं-पंचक्रोशी यात्री

सिंहस्थ मेला अवधि में पंचक्रोशी यात्रा का पडाव कालियादेह/बावनकुण्ड रहता है। धार जिले के ग्राम आचना निवासी रामकिशोर ने 80 वर्ष अपनी पत्नी एवं पुत्र के साथ पंचक्रोशी यात्रा में आकर कालियादेह में पडाव किया। उन्होंने बताया कि यह यात्रा पुत्र की दीर्घायु एवं जीवन में सुख-समृद्वि लाने के उद्देश्य से की जाती है। यात्री कालियादेह में रात्रि विश्राम के दौरान बावन कुण्डों में स्नान उपरांत जलेबी चढाते हैं। जितने पुत्र होते हैं, उतनी जलेबी चढाकर पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान शिवशंकर का विवाह माता पार्वती से हुआ। विवाह के बाद माता पार्वती ने जब पहली बार रसोई बनाई, तो रसोई में जलेबी बनाई और क्षिप्रा माता को चढाई। माता का अनुसरण कर हम लोग भी जलेबी चढाते हैं और पुत्रों की दीर्घायु की कामना करते हैं।

पंचक्रोशी यात्रा का प्रथम पड़ाव पिंग्लेश्वर मंदिर में, द्वितीय पड़ाव करोहन कायावरोहणेश्वर, तृतीय पडाव अंबोदिया बिल्वकेश्वर मंदिर, चतुर्थ उपपडाव कालियादेह एवं जैथल दुर्दरेश्वर महादेव मंदिर तथा पंचम पड़ाव उण्डासा के रेतीघाट पर होता है। यात्रा के उपरांत क्षिप्रा नदी में स्नान कर महाकालेश्वर के दर्शन एवं मंगलनाथ में उबला चावल चढ़ाकर प्रसाद के रूप में वितरण कर खाते हैं।

पंचकोशी यात्रियों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन द्वारा हर जरूरी सुविधायें मुहैया करवाई गई हैं। इनमें सड़क मार्ग, बैरीकेटिंग, पेयजल, छाया हेतु टेन्ट, बिछावन, प्रकाश, चिकित्सा शिविर, कंट्रोल रूम, पुलिस, गोताखोर, खोया-पाया घोषणा कक्ष, प्याउ, पेयजल टंकी, अस्थाई शौचालय, फब्बारे, सुरक्षा व्यवस्था एवं जनसुविधा केन्द्रों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। तीर्थयात्रियों ने बताया कि राज्य सरकार पूर्व में हुए महाकुंभ मेले की व्यवस्था की अपेक्षा इस सिंहस्थ में और बेहतर व्यवस्थाएं की हैं। यह एक यादगार सिंहस्थ है

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