19-Oct-2019

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फारूक अब्दुल्ला की हिरासत पर ओवैसी का सवाल- 80 साल के शख्स से सरकार को कैसा खतरा

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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में लिया गया है. केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में ये जानकारी दी. इस एक्ट के तहत बिना सुनवाई के दो साल तक किसी को भी हिरासत में रखा जा सकता है. इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने फारूक अब्दुल्ला की हिरासत पर सवाल उठाए हैं.

हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owais) ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से आर्टिकल 370 हटाए जाने से ठीक पहले फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मुलाकात की थी. ऐसे में वो देश के लिए खतरा कैसे हो सकते हैं. ओवैसी ने पूछा कि आखिर 80 साल के फारूक अब्दुल्ला से सरकार को कैसा डर है, जो उन्हें पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा गया है.

कब से हिरासत में हैं फारूक अब्दुल्ला?
एमडीएमके नेता वाइको की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या अब्दुल्ला किसी प्रकार की हिरासत में हैं? इस पर वाइको के वकील ने कोर्ट को बताया, 'केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा है कि फारूक अब्दुल्ला किसी प्रकार की हिरासत में नहीं है, लेकिन हमें उनका पता ठिकाना मालूम नहीं है.' वकील ने ये भी बताया कि अब्दुल्ला को 4 अगस्त से नजरबंद रखा गया है. इस पर अदालत ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर को नोटिस जारी करते हुए 30 सितंबर तक जवाब मांगा है.

अब्दुल्ला के घर को घोषित किया सब्सिडियरी जेल
एमडीएमके के नेता वाइको की तरफ से वकील ने कोर्ट को बताया कि अब्दुल्ला के घर को सब्सिडियरी जेल घोषित कर दिया गया है. उन्हें अभी घर पर ही रहना होगा. हालांकि, इस दौरान दोस्त और रिश्तेदार उनसे मिल सकते हैं. हाल ही में कोर्ट ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों को फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला से मिलने की इजाजत दी थी. हालांकि, प्रतिबंधों के कारण वो मीडिया से बात नहीं कर पाए थे.

जम्मू-कश्मीर पर झूठ बोल रही है सरकार
AIMIM अध्यक्ष ओवैसी ने सरकार पर जम्मू-कश्मीर को लेकर झूठ बोलने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद का जिक्र करते हुए कहा, 'क्यों एक पूर्व मुख्यमंत्री को जम्मू-कश्मीर का दौरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ रही है? इससे जाहिर हो रहा है कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य नहीं हैं.' ओवैसी ने आगे कहा कि अगर सरकार दावा कर रही है कि वहां हालात सामान्य हैं, तो क्यों वहां पर राजनीति नहीं की जा सकती?

सरकार ने जम्मू-कश्मीर पर क्या कहा है?
केंद्र ने बेंच को बताया कि कश्मीर स्थित सभी अखबार समय से प्रकाशित हो रहे हैं. सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है. प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं. पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है. केंद्र ने ये भी बताया कि दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं.

5 अगस्त के बाद नहीं चली एक भी गोली
केंद्र सरकार ने ये भी बताया कि एक गोली भी नहीं चलाई गई और कुछ स्थानीय प्रतिबंध लगे हैं. कश्मीर संभाग के 88 प्रतिशत से अधिक थाना क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं. कोर्ट को बताया गया कि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक यहां 41,866 लोग जान गंवा चुके हैं, 71038 हिंसा की घटनाएं हुई हैं और 15,292 सुरक्षा बलों को जान गंवानी पड़ी.

क्या है पब्लिक सेफ्टी एक्ट?
जम्मू-कश्मीर में पब्लिक सेफ्टी एक्ट साल 1978 में तत्कालीन शेख अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला के पिता) की सरकार द्वारा लागू किया गया था. ये कानून सरकार को ताकत देता है कि वह बिना किसी ट्रायल के किसी शख्स को दो साल तक हिरासत में रख सकता है. तत्कालीन शेख अब्दुल्ला सरकार ने लकड़ी तस्करों पर लगाम कसने के लिए ये कानून बनाया था. इस कानून का बहुत विरोध हुआ, लेकिन अभी तक ये कानून लागू है. हालांकि, साल 2010 में इस कानून में कुछ बदलाव किए गए हैं और इसकी कठोरता को कम किया गया है.

साभार- न्‍यूज 18

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