21-Jul-2019

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मुख्यमंत्री, वासवानी के सहकारी बैंक का फर्जीवाड़ा उजागर करने का साहस दिखायें

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नोटबंदी के बाद खुले 100 खातों का ब्यौरा जारी करें: अरूण यादव

भोपाल 22 दिसम्बर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव ने नोटबंदी के बाद भोपाल के उपनगर बैरागढ़ स्थित ‘‘महानगर सहकारी बैंक’’ में 10 से 15 नवंबर के बीच खोले गये 100 बैंक खातों से जुड़ा समूचा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से की है।

यादव ने गुरूवार को जारी एक बयान में कहा है कि बैंक में हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा इनकम टैक्स छापों के दौरान उजागर हुआ है। नोटबंदी के बाद खुले 100 बैंक खातों में दो दर्जन से ज्यादा ऐसे खाते सामने आये हैं जिनमें 1000 और 500 के पुराने नोटों की बड़ी खेप जमा हुई है। बैंक भाजपा और संघ से जुड़े नेता सुशील वासवानी का है। कंडक्टर से करोड़पति बने वासवानी से प्रदेश के कई मंत्रियों, भाजपा के आला नेताओं और आरएसएस के नामी-गिरामी लोगों के रिश्ते जगजाहिर हैं।

यादव ने कहा है इनकम टैक्स की रेड में साफ संकेत मिल रहे हैं नोटबंदी के बाद वासवानी का बैंक, कैबिनेट के वरिष्ठ सहयोगियों, आरएसएस एवं प्रदेश भाजपा के जाने-माने नेताओं और इनके नाते-रिश्तेदारों का जमकर ‘‘मददगार’’ बना। कुल मिलाकर वासवानी का बैंक भाजपा और संघ के नेताओं के लिये भ्रष्टाचार की गंगोत्री साबित हुआ है। श्री यादव ने याद दिलाया है कि मुख्यमंत्री कहते हैं, ईमानदार और सहज लोगों के लिये वे पुष्प के माफिक नर्म हैं, लेकिन दुष्ट और भ्रष्टाचारियों के लिय वज्र के समान हैं। लिहाजा, मुख्यमंत्री को वासवानी के बैंक में हुआ घोटाला सार्वजनिक कर भ्रष्टाचारियों का पर्दाफाश करने और लिप्त पाये गये बड़े से बड़े चेहरे को अपने कथन अनुसार दंडित करने का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए? श्री यादव ने कहा कि बैंक के 100 खातों के अलावा अन्य उन खातों का ब्यौरे भी सार्वजनिक होना चाहिए जो प्रदेश भाजपा और संघ के जिम्मेदार नेताओं और उनके नाते-रिश्तेदारों के हैं एवं जिन खातों में नोटबंदी के बाद बड़ी तादाद में हजार और पांच सौ के पुराने नोट खपाये गये हैं।

आधा दर्जन मंत्री शामिल

यादव ने कहा कांग्रेस को सूत्रों से जानकारी मिली है, प्रदेश सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों के इस पूरे गड़बड़झाले में लिप्त होने के प्रमाण सामने आये हैं। संघ के बड़े चेहरों, भाजपा के दर्जनों प्रभावशाली नेताओं और राज्य सरकार के कई अफसरों के भी भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धोने के सबूत इनकम टैक्स के हाथ लगे हैं। सूत्र बतला रहे हैं गड़बडि़यां उजागर होने के बाद से प्रभावशाली लोग मामले को रफा-दफा करवाने की जुगतबाजी में जुटे हैं। सचाई क्या है? इसे प्रदेश के सामने लाना मुख्यमंत्री श्री चौहान और उनकी सरकार का दायित्व है।
 
राहुल गांधी के आरोप की प्रधानमंत्री निष्पक्ष एजेंसी से करायें जांच 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात के मेहसाणा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री पर गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान सहारा कंपनी से 6 महीने में कई बार में करोड़ों रूपये लिये जाने के निजी भ्रष्टाचार की जानकारी उजागर किये जाने के गंभीर आरोप के बाद भ्रष्टाचार को लेकर ‘‘न खाऊंगा न ही खाने दूंगा’’ और ‘‘नोटबंदी’’ जैसे तुगलकी निर्णय लेने वाले प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि यदि राहुल गांधी द्वारा लगाये गये आरोप गलत हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराने में ‘‘गंगा से पवित्र’’ प्रचारित करवाने वाले प्रधानमंत्री को क्या गुरेज है? उन्होंने यह भी कहा कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार तथाकथित बहुप्रचारित नैतिकता, नई संस्कृति व संस्कारों का पैरोकार है तो उसे जांच पूरी होने तक प्रधानमंत्री को पद से इस्तीफा देने के लिए निर्देश देना चाहिए, ताकि संघ की कथनी और करनी का स्पष्ट अंतर दिखाई दे?

यादव ने यहां यह भी जोड़ा है कि यदि संघ ऐसा नहीं करता है तो भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में शाब्दिक जुगाली कर रहे प्रधानमंत्री का भी नैतिकता के नाते कर्तव्य है कि वे स्वयं जांच पूरी होने तक अपने पद से इस्तीफा देकर एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें? आज यहां जारी अपने बयान में श्री यादव ने कहा कि 22 नवम्बर, 2014 को सहारा कंपनी पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था, इस छापे के दौरान जप्त रिकार्ड के अनुसार  30 अक्टूबर, 2013 को 2.50 करोड़ रूपये, 12 और 29 नवम्बर, 2013 को 5-5 करोड़ रूपये, फिर 6 और 19 दिसम्बर को 5-5 करोड़, 14 व 28 जनवरी, 2014 को 5-5 करोड़, और फरवरी, 2014 को 5 करोड़ रूपये दिये गये, जो एक गंभीर आचरण होकर कदाचरण की पुष्टि कर रहा है। विभिन्न अवसरों पर ऐसा प्रचारित किया जाता है कि भाजपा नैतिक तौर पर राजनैतिक शुचिता की पक्षधर होने का हमेशा दावा करती है, यदि उसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर देश के प्रधानमंत्री के रूप में निर्वाचित नरेन्द्र मोदी पर कांग्रेस उपाध्यक्ष ने उक्त गंभीर आरोप लगाया है तो निश्चित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी अपनी पार्टी द्वारा प्रचारित राजनैतिक शुचिता का सम्मान करते हुए     श्री मोदी से उक्त आरोपी की निष्पक्ष जांच और जांच होने तक प्रधानमंत्री से अपने पद से इस्तीफा देने का उन्हें पदामर्श देना चाहिए।

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