21-Nov-2019

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एम पी: स्‍थानान्‍तरण से एक माह के लिए प्रतिबंध हटाया, परिवहन को छोड़ सभी विभागों पर लागू हाेगी नई नीति

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किस संवर्ग में कितने होंगे तबादले

पद--अधिकतम तबादले

200 तक--20 प्रतिशत

201 से 2000 तक-- 10 प्रतिशत

2000 से अधिक--पांच प्रतिशत

भोपाल। लगातार तबादलों को लेकर विपक्ष के आरोपों के घेरे में आ रही कमलनाथ सरकार ने मंगलवार को  प्रदेश सरकार ने राज्य औेर जिला स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादलों से मंगलवार को प्रतिबंध हटा लिया। नई तबादला नीति के हिसाब से विभाग पांच जून से पांच जुलाई तक तबादलें कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। जिले के भीतर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद ही तबादला होगा। एक जिले से दूसरे जिले और राज्य स्तर पर तबादला करने के लिए विभागीय मंत्री से अनुमति लेनी होगी। परिवहन विभाग को छोड़कर सभी विभागों में यही तबादला नीति लागू होगी। तबादले में सबसे पहले अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थापना की जाएगी। सौ फीसदी पद भरने के बाद गैर अनुसूचित क्षेत्रों में खाली पदों को भरा जाएगा। अनुसूचित क्षेत्रों में तीन साल की सेवा पूरी करने पर ही तबादला किया जाएगा। अनुसूचित क्षेत्रों से तब तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक उस स्थान पर दूसरा अधिकारी या कर्मचारी न आ जाए। यह शर्त अनुसूचित क्षेत्र से अनुसूचित क्षेत्र में होने वाले तबादले पर लागू नहीं होगी।

जिले के अंदर पुलिस अधीक्षक प्रभारी मंत्री से सलाह करके पदस्थापना करेंगे। डीएसपी या उससे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद समन्वय में मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद होंगे। स्वयं के व्यय को छोड़कर बाकी आवेदन ऑफलाइन लिए जाएंगे। कार्यपालिक अधिकारियों व कर्मचारियों (अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्याक्ता महिलाओं को छोड़कर) को गृह जिले में तबादले के माध्यम से पदस्थ नहीं किया जाएगा। मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री कमलनाथ की हरी झंडी मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 2019-20 के लिए तबादला नीति जारी कर दी।

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पदस्थापना सामान्य प्रशासन विभाग करेगा। जिले के भीतर कलेक्टर प्रभारी मंत्री से सलाह करके इन्हें पदस्थ करेंगे। यही व्यवस्था तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर भी लागू होगी। जिले में पदस्थ प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों के एक स्थान पर तीन साल पूरा करने पर प्राथमिकता के आधार पर तबादला किया जाएगा।

स्‍थानान्‍तरण नीति के प्रमुख बिंदू

चिकित्सकों के लिए छूट दी गयी हैं, वे एक स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रह सकते हैं। स्वयं के व्यय पर स्थानांतरण के आवेदन ऑनलाइन होंगे। स्वेच्छा से तबादलों में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने लक्ष्य को पूरा किया है। सेवानिवृत्ति पर एक साल या उससे कम समय होने पर स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। यदि जरूरी है तो फिर विकल्प लिए जाएंगे। पति-पत्नी को स्वयं के व्यय पर एक ही जगह पदस्थ किए जाने के आवेदन पर प्रशासकीय व्यवस्था के हिसाब से फैसला लिया जाएगा। कैंसर, किडनी खराब होने, ओपन हार्ट सर्जरी सहित गंभीर बीमारियों में मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर तबादला चाहने पर स्थानांतरण किया जाएगा।

40 प्रतिशत या उससे अधिक नि:शक्तता होने पर सामान्य स्थितियों में स्थानांतरण नहीं किया जाएगा, लेकिन स्वेच्छा से आवेदन पर विचार होगा। मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो पदावधि तक तबादले से छूट रहेगी। जिस जिले में अधिकारी पहले पदस्थ रह चुका हो, वहां उसी पद पर पदस्थापना नहीं की जाएगी।    कार्यमुक्ति दो सप्ताह में करनी होगी। तबादला आदेश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई होगी। दोहरा प्रभार नहीं दिया जाएगा। अटैचमेंट को समाप्त करना होगा। कृषि विभाग के तृतीय श्रेणी कार्यपालिक कर्मचारियों को गृह तहसील और विकासखंड छोड़कर जिले में पदस्थ किया जा सकता है। कॉलेजों में तय संख्या से ज्यादा शिक्षक होने पर अतिशेष का दूसरी जगह पदस्थ किया जाएगा। कम लिंगानुपात वाले जिलों में महिला अधिकारी की पदस्थापना को प्राथमिकता दी जाएगी। आपराधिक प्रकरण लंबित होने पर कार्यपालिक पदों पर तैनात नहीं किया जाएगा।

ये हैं पूरी स्‍थानान्‍तरण नीति

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