25-Jun-2018

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क्या मोदी और भाजपा भ्रष्टाचार के इन दोनों गंभीर मामलों में स्वतंत्र जांच कराने के लिए तैयार हैं- मोहन प्रकाश

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राजकाज न्‍यूज, भोपाल

कांग्रेस के राष्‍ट्रीय महासचिव माेहन प्रकाश ने भोपाल में आयोजित प्रत्रकार वार्ता में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी पर लगे भ्रष्‍टाचार के आरोप की स्‍वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। क्‍या मोदीजी एवं भाजपा ऐसा करेगी। उन्‍होंने कहा कि ‘नोटबंदी’ भारत के गरीब, किसानों, मज़दूरों, दुकानदारों, मध्यम वर्ग तथा छोटे कारोबारियों पर एक सर्जिकल स्ट्राईक है। 8 नवंबर, 2016 को देश की 86 फीसदी करेंसी को बंद करके नरेंद्र मोदी ने 1 प्रतिशत कालाधनधारकों को पकड़ने के लिए 99 प्रतिशत ईमानदार, मेहनतकश भारतीयों पर मुसीबतों का पहाड़ तोड़ दिया। भारत में ‘तरक्की का पहिया’ जाम हो गया है और पूरे देश में ‘आर्थिक अराजकता’ छा गई है।

मोहन प्रकाश ने क्‍या कहा पत्रकार वार्ता में ...

नोटबंदी- भारत का सबसे बड़ा घोटाला
1.    नोटबंदी स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला साबित हुआ है, जिसके कई उदाहरण हैं:-

;पद्ध    नोटबंदी के दिन कोलकाता बैंक में भाजपा के खाते सं. 554510034 में 500 रु./1000 रु. के नोटों में 3 करोड़ रु. जमा किए गए। बार बार मांग उठाए जाने के बाद भी भाजपा और आरएसएस ने 1 मार्च, 2016 से 8 नवंबर, 2016 के बीच देशभर में अपने खातों में जमा किए गए पैसे की जानकारी जनता के सामने नहीं रखी। साफ है कि पूरी दाल ही काली है।
;पपद्ध    नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा और आरएसएस ने पूरे देष में सैकड़ों करोड़ रु. की संपत्तियां खरीदीं। कांग्रेस ने बिहार में 3.41 करोड़ रु. मूल्य की 8 संपत्तियों तथा ओडिषा में 18 संपत्तियों की सूची जारी की है। इन संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य इससे भी कहीं ज्यादा है। इस सबके बावजूद श्री नरेंद्र मोदी और श्री अमित शाह पिछले एक साल में भाजपा/आरएसएस द्वारा खरीदी गई संपत्तियों का विवरण जनता के सामने नहीं रख रहे हैं। क्या इससे यह साबित नहीं होता है कि भाजपा को नोटबंदी की जानकारी पहले से थी और इसीलिए उन्होंने नोटबंदी से ठीक पहले अपने कालेधन को संपत्ति खरीदकर सफेद बनाने की साजिष रची जा रही थी?
;पपपद्ध    सितंबर, 2016 में 5,88,600 लाख करोड़ रु. की अतिरिक्त राशि बैंकों में जमा की गई। इसमें से 1 सितंबर से 15 सितंबर, 2016 के बीच जमा किए गए फिक्स्ड डिपॉजि़ट ही 3 लाख करोड़ रु. से ज्यादा थे। क्या इससे यह साबित नहीं होता कि कि ‘नोटबंदी के फैसले’ की जानकारी कुछ लोगों को पहले से थी। मोदी सरकार इस बात पर कोई जवाब नहीं दे रही है और न ही वो 25 लाख रु. से ज्यादा पैसा बैंकों में जमा कराने वालों का नाम ही जनता के सामने रख रही है।
;पअद्ध    चौंकाने वाली बात यह है कि नोटबंदी से ठीक पहले 8 सितंबर, 2016 को इंदिरापुरम, गाजि़याबाद, उत्तरप्रदेश में हरियाणा के नंबर- भ्त्.26।त्.9662 की मारुति स्विफ्ट कार से  3 करोड़ रु. के नोट जब्त किए गए। कार में बैठे दो लोगों, सिद्धार्थ शुक्ला एवं अनूप अग्रवाल ने दावा किया कि यह पैसा उनका है और वो इस पैसे को लखनऊ लेकर जा रहे हैं। गाजि़याबाद के सिटी भाजपा अध्यक्ष, अशोक मोंगा ने पुलिस थाने पहुंचकर एक लैटरपैड पर लिखकर दिया कि यह पैसा ‘भाजपा के केंद्रीय कार्यालय से लखनऊ में भाजपा के राज्य कार्यालय में भेजा जा रहा था’। क्या श्री नरेंद्र मोदी और श्री अमित शाह इस पैसे का स्रोत तथा नोटबंदी से ठीक पहले यह पैसा नकद में भेजने का कारण बताएंगे? उन्होंने यह पैसा डिजिटल ट्रांसफर या चेक के जरिए क्यों नहीं भेजा, जिसके बारे वो पूरे देश को उपदेश दे रहे हैं?
2.    जहां एक तरफ देश के आम नागरिक बैंकों से अपना पैसा निकालने के लिए कई दिनों तक लाईनों में खड़े इंतजार कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार की सरपरस्ती में 30 प्रतिशत के कमीशन पर काले धन को सफेद बनाने तथा नए नोटों में बदलने के लिए एक ‘काला बाजार’ फल फूल रहा है। गौरतलब बात यह है कि इसमें शामिल किसी भी भाजपा नेता की भूमिका की जांच नहीं की गई है।  

;प्द्ध    श्री अमित शाह अहमदाबाद में अहमदाबाद जिला को-ऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर हैं। नोटबंदी के 3 दिनों में इस बैंक में 500 करोड़ रु. जमा किए गए। फिर श्री अमित शाह की जांच क्यों नहीं की गई?
;प्प्द्ध    महाराष्ट्र की भाजपा सरकार में मंत्री, पंकजा मुंडे और उनकी बहन तथा भाजपा सांसद, प्रीतम मुंडे वैद्यनाथ को-ऑपरेटिव बैंक की संचालिका तथा मालिक हैं। बैंक की गाड़ी से 10.10 करोड़ रु. जब्द किए गए जिनमें 10 करोड़ रु. पुराने नोटों तथा 10 लाख रु. नए नोटों में थे। फिर इनकी जांच क्यों नहीं की गई?
;प्प्प्द्ध    अहमदाबाद, गुजरात के महेश शाह ने वॉल्युनटीयरी इंकम डिस्क्लोज़र योजना में 13,860 करोड़ रु. के कालाधन की घोषणा की। उसके बाद वो पीछे हट गए। जब वो एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उन राजनीतिज्ञों और अफसरों के नाम बताने वाले थे, जो इस कालाधन के असली मालिक हैं, तो आयकर अधिकारी उन्हें टेलीविज़न स्टूडियो से ही उठा ले गए। गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री, श्री सुरेशभाई मेहता ने श्री नरेंद्र मोदी और श्री अमित शाह के साथ महेश शाह के संबंधों का खुलासा किया है। तो ऐसे में मोदी जी और श्री अमित शाह की जांच क्यों नहीं की गई?
;प्टद्ध    कर्नाटक के भाजपा नेता एवं भूतपूर्व मंत्री, जी. जनार्दन रेड्डी के सहयोगी, रमेश गौड़ा ने आत्महत्या करते हुए एक सुसाईड नोट छोड़ा, जिसमें 100 करोड़ रु. का काला धन को बदलने का सीधा आरोप लगाया। इतने ठोस सबूत के बावजूद भी, जांच क्यों नहीं की गई?
;टद्ध    महाराष्ट्र में भाजपा के कोऑपरेटिव मंत्री, सुभाष देशमुख की कार से 91.50 लाख रु. की नकद राशि जब्त की गई। फिर इसकी जांच क्यों नहीं की गई?
;टप्द्ध    भाजपा के कई नेता नई और पुरानी नकदी के साथ पकड़े गए हैं। पंजाब में भाजपा के कानूनी प्रकोष्ठ के सहसंयोजक, संजीव कंबोज ने नए 2000 के नोटों की गड्डियों के साथ अपने फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर डाले। पश्चिम बंगाल से भाजपा नेता, मनीष शर्मा, जो एक केंद्रीय मंत्री के नज़दीकी हैं, 33 लाख रु. के नई करेंसी नोटों के साथ पकड़े गए। सालेम, तमिलनाडु में भाजपा के युवा विंग के नेता, अरुण 20.55 लाख रु. के नए करेंसी नोटों के साथ पकड़े गए। मध्यप्रदेश में भाजपा नेता, सुशील वासवानी के घर छापा मारकर काफी काला धन जब्त किया गया। क्या इन सबकी जांच की गई?   

नोटबंदी- आर्थिक अराजकता तथा मुसीबतों का टूटता पहाड़

1ण्    नोटबंदी के 50 दिनों में 115 से अधिक निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौत हुई। प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी को इन परिवारों से मॉफी मांगकर उन्हें मुआवज़ा देना चाहिए।
2ण्    मोदी सरकार एवं आरबीआई (जो अब ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ बन गया है) ने 50 दिनों में 135 बार नियमों में बदलाव किया। सरकार तथा आरबीआई देश को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।
3ण्    नोटबंदी के फैसले ने 86 प्रतिशत करेंसी को चलन से बाहर कर दिया। विशेषज्ञों की मानें तो, 500 रु. के 1758 करोड़ नोट तथा 1000 रु. के 668 करोड़ नोट, यानि 15 लाख करोड़ रु. के कुल 2326 करोड़ नोट चलन से बाहर हो गए। नोट छापने की दो सरकारी कंपनियों, यानि ‘भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रण प्राईवेट लिमिटेड’ तथा ‘सिक्योरिटी प्रिंटिंग एण्ड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ की नोट छापने की क्षमता से चलन से बाहर हुए नोटों के बराबर संख्या में नोट छापने में आठ महीने तक का समय लगेगा। तो फिर 30 दिसंबर, 2016 तक स्थिति सामान्य किस प्रकार हो सकेगी।
4ण्    प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने कृषि अर्थव्यवस्था पर करारा प्रहार किया है। रबी की फसलों पर सबसे बुरा असर पड़ा है। कैश फसलें जैसे टमाटर और प्याज क्रमशः केवल 1 रु./किलो तथा 50 पै./किलो पर बिक रहे हैं। यही हालत मटर, गोभी व अन्य सब्जियों की है। इससे भी अधिक कड़ी चोट मोदी सरकार ने 370 जिला केंद्रीय को-ऑपरेटिव बैंकों तथा 93,000 से अधिक कृषि क्रेडिट सोसायटीज़ को नोटबंदी के फैसले से बाहर रखकर की। किसान के लिए कर्ज का यह एकमात्र साधन है तथा असली नुकसान किसान का हुआ।
5ण्    छोटे एवं मध्यम उद्योग बंद हो रहे हैं और नौकरियां खत्म हो रही हैं। तमिलनाडु में तिरुपुर हो, हरियाणा में फरीदाबाद, पंजाब में लुधियाना हो या गुजरात में सूरत, सभी औद्योगिक केंद्रों में कारोबार ठप्प पड़ा है। यही हाल रेहड़ी पटरी वालों, हॉकर्स, बढ़ई, प्लंबर, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिीशियन, लोहार, कपड़ा व्यापारियों, किराना दुकानदारों, सब्जीवालों, छोटे कारोबारियों और दुकानदारों का है। सच तो यह है कि भारत में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाली कैश की ईमानदार अर्थव्यवस्था मोदी सरकार के इस एकतरफा फैसले से पूरी तरह से टूट गई है।
6ण्    नोटबंदी ने देश की आय को गहरी चोट पहुंचाई है और जीडीपी में 2 प्रतिशत या उससे ज्यादा की कमी आएगी, जैसा डॉ. मनमोहन सिंह ने भी बताया। ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनॉमी’ (सीएमआईई) की मानें तो पहले 50 दिनों में कुल 1,28,000 करोड़ रु. का नुकसान हुआ है।

श्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप - सहारा एवं बिरला से धनवसूली

एक तरफ नोटबंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता भी संदेह के दायरे में आ गई। संलग्नक ।.1 तथा ।.2 में लगे दस्तावेजों की मानें, तो बिरला और सहारा मामले में श्री नरेंद्र मोदी पर कालाधन लेने तथा भ्रष्टाचार करने के गंभीर आरोप हैं।

;ंद्ध    आदित्य बिरला ग्रुप
;पद्ध    आयकर अधिकारियों ने 15 अक्टूबर, 2013 को दिल्ली में आदित्य बिरला ग्रुप पर छापा मारा। 25 करोड़ रु. का कैश पाया गया। ग्रुप के वाईस प्रेसिडेंट का लैपटॉप जब्त किया गया। लैपटॉप में 16 नवंबर, 2012 की एक ईमेल मिला, जिसमें कहा गयाः
‘‘गुजरात सीएम - 25 करोड़ (12 पूरे हुए; बाकी ?)’’
    
यह कोई डायरी या प्रारंभिक अक्षर नहीं हैं। यह ईमेल गुजरात के मुख्यमंत्री को दिए गए पैसे के बारे में बता रहा है।
;पपद्ध    आयकर अधिकारियों ने आयकर कानून की धारा 131 के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियों का प्रयोग करके आदेश दिनांक 27.02.2014 द्वारा यह निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में जांच होनी चाहिए।
;पपपद्ध    आयकर विभाग ने छापेमारी के दौरान सीबीआई के बाकी दस्तावेज़ मांगे। ये दस्तावेज़ आयकर विभाग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिनांक 25 जुलाई, 2014 को दिए गए, जब केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार बन चुकी थी।
;पअद्ध    मोदी सरकार के ढाई सालों के काम में आयकर विभाग और सीबीआई ने इस मामले में जांच आगे क्यों नहीं बढ़ाई? क्या ऐसा केवल इसलिए है कि इस मामले में ‘‘गुजरात के मुख्यमंत्री’’ पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप है, जो आज भारत के प्रधानमंत्री बन चुके हैं?
 
;इद्ध    सहारा ग्रुप
;पद्ध    भ्रष्टाचार का दूसरा गंभीर मामला सहारा ग्रुप का है। आयकर विभाग ने 22 नवंबर, 2014 को सहारा ग्रुप पर छापा मारा। इस समय मोदी सरकार को बने छः माह गुजर चुके थे।

;पपद्ध    आयकर विभाग द्वारा जब्त किए गए दस्तावेज़ों में ‘मोदी जी’ को 6 माह में 9 बार नकद पैसा दिए जाने की बात कही गई, जिसका कुल मूल्य 40.1 करोड़ रु. है। 22 नवंबर, 2014 की दिनांक के इस दस्तावेज़ पर आयकर अधिकारियों तथा गवाहों के हस्ताक्षर हैं।

क्या मोदी जी और भाजपा भ्रष्टाचार के इन दोनों गंभीर मामलों में स्वतंत्र जांच कराने के लिए तैयार हैं?

नोटबंदी के नुकसान का मुआवज़ा - कांग्रेस पार्टी की मांगें

कांग्रेस के उपाध्यक्ष, श्री राहुल गांधी तथा कांग्रेस पार्टी देश के 125 करोड़ लोगों की ओर से मांग करती है कि नोटबंदी के चलते भारी नुकसान का शिकार हुए लोगों को मुआवज़ा दिया जाए। देश के लोगों की पांच मांगें हैं:-

1.    बैंक से पैसा निकालने की पाबंदी फौरन हटाओ और 8 नवंबर से पैसा निकालने की तारीख तक सभी ठंदा ।बबवनदज भ्वसकमते को 18ः ब्याज दो। ब्ंेीसमेे लेन-देन पर कमीशन बंद करो।
2.    भोजन के अधिकार के तहत दिए जाने वाले राशन की कीमत को 1 साल के लिए आधा किया जाए। हमारी मांग है कि किसानों को रबी की फसलों में डैच् पर 20ः बोनस दो, ताकि नोटबंदी से हुए नुकसान की भरपाई हो।
3.    नोटबंदी से महिलाओं को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। हमारी मांग है कि कम से कम ठच्स् परिवार की एक महिला के खाते में 25,000 रु. जमा करवाएं।
4.    एक साल के लिए मनरेगा मज़दूरों के काम के दिन और दिहाड़ी दोगुनी की जाए। इसके साथ एक विशेष अभियान के तहत नोटबंदी से बेरोज़गार हुए मज़दूरों को 8 नवंबर, 2016 से 31 मार्च, 2017 तक डपदपउनउ ॅंहम के बराबर बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए।
5.    हमारी मांग है कि छोटे दुकानदारों व उद्योगों को प्दबवउम ज्ंग व ैंसमे ज्ंग में 50ः की छूट दी जाए। ैंसमे ज्ंग छूट से प्रांतों को होने वाले नुकसान का भुगतान मोदी सरकार करे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
नोट बंदी के पीछे के सत्य को उजागर किये जाने के संबंध में कांग्रेस पार्टी श्वेत पत्र की मांग करती है। इस संदर्भ में कांग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से निम्नलिखित 5 प्रष्न पूछना चाहती है:-

1.    8 नवम्बर 2016 के पश्चात कितना काला धन मिला ?
2.    नोट बंदी से देष की कितना आर्थिक नुकसान हुआ ? नोट बंदी की घोषणा के पश्चात कितने लोगों का रोजगार गया एवं जिंदगियॉ खत्म हुई।

3.    नोट बंदी के कारण कितने लोगों की जान गई ? एवं प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा मुआवजा मुहैया क्यों नहीं करवाया गया ?

4.    नोट बंदी के क्रियान्वयन को लेकर तैयारियों एवं विचार विमर्ष की प्रक्रिया क्या थी ? आम जनता के ऊपर इस कठोर नियम को लागू करने से पूर्व विषेषज्ञ, अर्थषास्त्रियों अथवा भारतीय रिजर्व बैंक से सलाह क्यों नहीं ली गई ?

5.    क्या केन्द्र सरकार 8 नवम्बर 2016 के छः माह पूर्व से अपने बैंक खातों में 25 लाख और इससे अधिक की रकम जमा करने वाले सभी व्यक्तियों, संस्थाओं की पहचान एवं नाम उजागर करेगी ?


भारत की जनता की तरफ से कांग्रेस पार्टी निम्नलिखित पॉच मांॅगें अग्रेषित करती है -

1.    पैसों की निकासी पर लगी सभी प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटाया जाऐ एवं इस प्रकार के प्रतिबंधो के कुल लागू समय पर सभी खाता धारकों को 18 प्रतिषत विषेष ब्याज उपलब्ध कराया जाऐ। हमारी मांग है कि सभी डिजिटल लेनदेन पर लगने वाले भुगतान को हटाया जाऐ।
2.    खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंर्तगत साल भर के अंदर खाद्य वितरण प्रणाली से राषन वितरण की समय दर को आधा किया जाना चाहिऐ। इसके अतिरिक्त सभी रबी की फसलों के समर्थन मूल्य पर एकमुष्त 20 प्रतिषत बोनस प्रदान किया जाना चाहिये।
3.    नोट बंदी के कारण महिलाओं को होने वाली अपार पीड़ा के मुआवजे के रूप में प्रत्येक बीपीएल परिवार की कम से कम एक महिला के खाते में 25 हजार रू. जमा किया जाना चाहिए।
4.    मनरेगा के अंर्तगत मिलने वाले भत्ते एवं सुनिष्चित कार्य दिवसों की संख्या को साल भर के लिए दो गुना किया जाना चाहिये। 8 नवम्बर 2016 से कितने लोग बेरोजगार हुए इस संबंध में सरकार को एक विषेष अभियान आयोजित करते हुए उनकी पहचान एवं संख्या दर्ज की जानी चाहिए तथा उनकों 31 मार्च 2017 तक न्युनतम भत्ते की दर से मुआवजा दिया जाना चाहिए
5.    छोटे दुकानदारो एवं व्यापारियों को इनकम टैक्स एवं सेल्स टैक्स में 50 प्रतिषत की छूट दी जानी चाहिए एवं इस प्रकार की टैक्स छूट के कारण राज्य सरकारों को होने वाली राजस्व हानि की प्रतिपूर्ति केन्द्र सरकार द्वारा की जानी चाहिए।

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