21-May-2018

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मध्‍यप्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री सुन्‍दरलाल पटवा नहीं रहे

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राजकाज न्‍यूज, भोपाल

मध्‍यप्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री सुन्‍दरलाल पटवा का दु:खद निधन हो गया। पटवा 92 वर्ष के थे। पटवा के निधन पर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्‍यक्‍त किया है। पटवा का अंतिम संस्‍कार 29 दिसम्‍बर को नीमच के कुकडेश्‍वर में दोपहर 1 बजे किया जाएगा। आज शाम को 4 बजे उनका पार्थिव शरीर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक रहेगा। राज्य शासन द्वारा जारी आदेश में 28 दिसम्बर से 30 दिसम्बर तक राजकीय शोक घोषित किया गया है। इस दौरान कोई भी शासकीय सांस्कृतिक समारोह नहीं होंगे और राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।

भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह ने पटवाजी के निधन पर दु:ख जाहिर किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि स्व.पटवा ने मध्यप्रदेश की राजनीति को नयी दिशा दी थी। वे अजातशत्रु राजनेता थे और प्रदेश की जनता के दिलों पर राज करते थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि स्व.पटवा का सभी दल सम्मान करते थे। उनके बिना मध्यप्रदेश की राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती। उनका देश के सार्वजनिक जीवन में विशिष्ट स्थान था। वे अदभुत राजनेता थे। उनके जाने से देश और प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में आयी रिक्तता की भरपायी नहीं की जा सकती। पटवा के बिना मध्यप्रदेश अधूरा है। ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व.पटवा के निधन पर प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक रहेगा।

पटवा के निधन का समाचार मिलने पर मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्‍नी साधना सिंह अस्‍पताल । चौहान ने उन्‍हें अजात शत्रु बताते हुए कहा कि वे अदभुत राजनेता थे। उन्‍होंने कहा कि पटवाजी के बिना मध्‍यप्रदेश अधूरा है। अस्‍पताल पहुंचने वालों में केन्‍द्रीय मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर, मंत्री डॉ. गौरीशंकर शैजवार, उमाशंकर गुप्‍ता, विश्‍वास सांरग, सांसद आलोक संजर, विधायक सुरेन्‍द्रनाथ सिेह सहित वरिष्‍ठ नेता शामिल हैं। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता अस्‍पताल पंहुच रहे हैं। इस बीच प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्‍तम मिश्र ने भी ट़वीट कर पटवा के निधन पर शोक व्‍यक्‍त किया हैं। वरिष्‍ठ भाजपा नेता कैलाश नारायण सांरग ने कहा कि एक पटवा युग समाप्‍त हो गया।

पटवा का 11 नवंबर 1924 को जन्म हुआ था। वे 20 जून, 1980 से 17 फरवरी 1980 तक पहली बार मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद पटवा 5 मार्च, 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक दूसरी बार मप्र के मुख्यमंत्री बने। वे 1997 में छिंदवाड़ा में हुए लोकसभा उपचुनाव में पहली बार सांसद बने। इसके बाद 1998 में होशंगाबाद से सांसद चुने गए और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बने। सौम्य व्यक्तित्व, शालीन व्यवहार, कुशल संगठन क्षमता, ओजस्वी वक्ता और विभिन्न जनसमस्याओं को उठाने वाले जुझारू नेता के रूप में सुन्दरलाल पटवा ने सार्वजनिक ओर राजनीतिक जीवन में अपनी एक अलग पहचान बनाई। सभ्रंात परिवार की पृष्ठभूमि के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संबंद्घता ने श्री पटवा के जीवन को उच्च आदर्शों के प्रति संस्कारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। श्री पटवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से  जुड़ने के पश्चात 1942 से 1951 तक विस्तारक रहे।

सुन्दरलाल पटवा का जन्म मंदसौर जिले के कुकडेश्वर कस्बे में एक प्रगतिशील श्वेताम्बर जैन परिवार में 11 नवम्बर 1924 को हुआ था। उनके पिता श्री मन्नालाल पटवा अपने क्षेत्र के एक ख्यातिप्राप्त व्यवसायी और प्रतिष्ठत समाज सेवी थे। पटवा की प्रारंभिक शिक्षा कुकडेश्वर और रामपुरा में हुई। अपने पारिवारिक परिवेश और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रतिबद्घता के कारण भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों, सामाजिक मर्यादाओं के प्रति रूझान के कारण पटवा इन्टरमीडियेट तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश कर गये। उन्होंने मनासा क्षेत्र से 1957 में मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया और अपने क्षेत्र की समस्याओं को मुखरित करने और उनके समाधान के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहे हैं। अपने क्षेत्र के प्रति जागरूकता के कारण वे पुनः 1962 में निर्वाचित हुए और विधान सभा में प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक रहे। विधान सभा की अनेक समितियों में उन्होंने प्रतिनिधित्व किया और भारतीय जनसंघ की प्रदेश शाखा के महामंत्री रहे।
        

मंदसौर जिले के सहकारिता आंदोलन को श्री पटवा ने नई चेतना प्रदान की। वे 1967 में नीमच सेन्ट्रल को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष निर्वाचित हुए और लम्बे समय तक इस बैंक के विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने सहकारिताआंदोलन को जनोन्मुखी बनाया उनके कार्यकाल में सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कमजोर वर्गों, शिल्पियोग और श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के सफल प्रयोग किये गये। इसके परिणामस्वरूप मंदसौर जिले में सहाकरिता के क्षेत्र में कई औद्योगिक परियोजनाएं शुरू हुई है।  पटवा की यह मान्यता रही है कि जब तक कृषि और दुग्ध व्यवसाय को आधुनिक स्वरूप प्रदान नहीं किया जाता, तब तक ग्रामीण अंचलों का अपेक्षित विकास सम्भव नहीं है। इस उद्देश्य से उन्होंने यूरोपीय देशों का भ्रमण किया और इंग्लैंड में डेयरी विकास का अध्ययन किया। दुग्ध विकास तथा .षि को आधुनिक स्वरूप देने के लिए उन्होंने अपने पारिवारिक फार्म में यह कार्य शुरू काराया। उनसे कनिष्ठ भ्राता समरथमल पटवा ने देश में कृषि उत्पादन प्रतियोगिता में दो बार द्वितीय स्थान प्राप्त कर कृषि पंडित की उपाधि प्राप्त की। मंदसौर जिले में क्रांति लाने में पटवा की भूमिका महत्वपूर्ण रही हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कुटीर उद्योगों को भी आधुनिक आधार प्रदान करने के लिए शिल्पियों को प्रोत्साहन प्रदान किया। वे ग्राम राज्य और सत्ता के विकेन्द्रीकरण के प्रवल पक्षधर है। पटवा अपनी पार्टी के सिद्धांतों और आदर्शों के प्रति समर्पित रहे और अपने झुझारू व्यक्तित्व के कारण वे आपतकाल के दौरान 18 माह तक कारावास की अवधि में पटवा ने अपना समय अध्ययन में लगाया। 1977 के आम चुनाव में आप फिर विधान सभा के लिए जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए और जनता विधायक दल के महामंत्री के रूप में आपने अपनी अपूर्व संगठन क्षमता का परिचय दिया। जनता शासन के अंतिम समय 20 जनवरी 1980 से 17 फरवरी 80 तक कुछ समय के लिए वे मुख्यमंत्री भी रहे और आपने ही प्रतिपक्ष के नेता को केबिनेट मंत्री का दर्जा देने का महत्वपूर्ण कदम उठाया था। इसके साथ ही उन्होंने तकनीकी विभागों के सचिव पद पर तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति और शासकीय सेवकों को केन्द्र के समान मंहगाई भत्ता देने का निर्णय लिया।

पटवा 1980 के चुनाव में सीहोर से विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और उन्होंने प्रतिपक्ष के नेता के रूप में विधान सभा में अपनी तार्किक ओर ओजस्वी शैली से विभिन्न जन समस्याओं को उठाकर प्रतिपक्ष की भूमिका को एक नया आयाम प्रदान किया। हरिजन, वनवासियों, ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों तथा समाज के गरीब तबकों की विभिन्न समस्याओं को पटवा ने न केवल विधान सभा में अपितु जन आंदोलनों के माध्यम से भी सशक्त रूप से समय-समय पर उठाया। इसमें संदेह नहीं है कि इन्हीं आंदोलनों के कारण भारतीय जनता पार्टी को व्यापक जनाधार प्राप्त हुआ है। श्री पटवा 1986 से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष और जागरूक विधायक के रूप में कार्यरत रहे। उन्होंने अपने विधायक जीवन में मनासा, मंदसौर, सीहोर और भोजपुर क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर उनके विकास के लिए अथक परिश्रम कर अपनी लोकप्रियता को बढ़ाया। सुंदरलाल पटवा अत्यंत निष्ठावान, स्वयंसेवक एवं कठोर परिश्रमी एवं दूरदर्शी राजनेता थे। उन्हांेने अपने कौशल और अपनत्व भरे व्यवहार से मध्यप्रदेश में जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को अनेकों कुशल कार्यकर्ताओं का निर्माण किया।

पटवा जी का सार्वजनिक जीवन इस प्रकार रहा:-

    ऽ    सन् 1942 से 51 तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता व विस्तारक।
    सन् 1948- संघ पर लगे प्रतिबंध के कारण 6 माह की जेल यात्रा।
    सन् 1951 से जनसंघ के संस्थापक सदस्य व सन् 1980 से भाजपा के संस्थापक सदस्य।
    विधायक- 1957 व 1962 मनासा, सन् 1977 मंदसौर, सन् 1980 सीहोर, सन् 1985, 90, 93, 98 भोजपुर।
    सांसद- सन् 1997 से 1998 छिंदवाड़ा, सन् 1999 से 2004 होशंगाबाद।
    विधानसीाा में नेता प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक- सन् 1962 से 67।
    अध्यक्ष - नीमच सेन्ट्रल को-आॅपरेटिव बैंक- सन् 1967 से 75।
    मीसा के तहत जेलयात्रा- सन् 1975 से 77 (19 माह)।
    मुख्यमंत्री- 20 जनवरी सन् 1980 से 17 फरवरी 1980 तक, 5 मार्च 1990 से 15 दिसम्बर 1992 तक।
    नेता प्रतिपक्ष - सन् 1980-85
    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सन् 1980-85 व सन् 1986-90
    केंद्रीय मंत्री - सन् 1999 से 2001 तक केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री।
    पदयात्रा- सन् 1984 में 2200 किमी की पदयात्रा जगदलपुर से झाबुआ।
    सन् 1994 में राजगढ़ जिले के ग्रामीण अंचल की पदयात्रा।
    वर्तमान- प्रदेश भाजपा के संरक्षण व मार्गदर्शक।

जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्रा ने किया शोक व्यक्त

जनसंपर्क, जलसंसाधन तथा संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के अवसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मंत्री डॉ. मिश्रा ने अपने शोक संदेश में कहा कि सुंदरलाल पटवा के अवसान से एक युग समाप्त हो गया है। मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि स्व. श्री सुंदरलाल जी पटवा ने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया। उन्होंने जनकल्याण, सुशासन और समाज के दीनहीन वर्ग की भलाई के लिए लगातार कार्य किया।

प्रदेश ने गम्भीर कार्य-शैली का एक महान नेता खो दिया

वाणिज्य-उद्योग,रोजगार, खनिज साधन तथा प्रवासी भारतीय मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने पूर्व मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है| शुक्ल ने स्व. पटवा के निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा है कि प्रदेश ने अपनी एक अलग पहचान तथा गम्भीर कार्य-शैली का महान नेता खो दिया है| उद्योग मंत्री ने कहा कि स्व.श्री पटवा का शुमार प्रदेश के कद्दावर राजनीतिज्ञों में था, उन्होंने कहा कि स्व.पटवा की उल्लेखनीय सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता| शुक्ल ने कहा कि विशेषकर उनका प्रदेश के मुख्यमंत्री का कार्यकाल स्मरणीय रहेगा|

पत्रकार वार्ता एवं समस्त कार्यक्रम निरस्त

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री सुदंरलाल पटवा के असामयिक दुखद निधन के कारण आज भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन की पत्रकारवार्ता एवं सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिये गये हैं।

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