20-Jun-2019

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क्षिप्रा स्नान के साथ ही श्रद्धालु कर रहे हैं गढ़कालिका एवं मंगलनाथ के दर्शन

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सिंहस्थ महाकुंभ के प्रथम शाही स्नान के बाद हजारों श्रद्धालुओं का उज्जैन नगरी के विभिन्न धार्मिक महत्व के मंदिरों के साथ गढ़कालिका एवं मंगलनाथ मंदिर पर पहुँचकर दर्शन लाभ लेने एवं क्षिप्रा नदी के घाटों पर स्नान कर पुण्य लाभ लेने का क्रम जारी है। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु के अलावा विदेशी नागरिक भी गढ़कालिका एवं मंगलनाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य कर रहे हैं।

महाकुंभ में श्रद्धालुओं का साधु-संतों और मंदिरों के दर्शन का क्रम अनवरत जारी रहेगा। मंदिरों के क्षेत्र में स्थित सिद्धवट के बाईं एवं दाईं ओर के अलावा कालभैरव, विक्रांत भैरव, अंगारेश्वर एवं भर्तृहरि घाट क्षिप्रा नदी पर श्रद्धालुओं को गहरे पानी में स्नान करने से रोकने के लिए सिद्धवट क्षेत्र में 92 एवं अन्य घाटों पर तकरीबन 100 होमगार्ड सैनिक तैनात किए गए हैं। साथ ही इन दोनों क्षेत्र के घाट पर 7 बोट भी तैनात की गई है।

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किया गया है। मंदिर परिसर में अस्थाई चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन पर बीमार श्रद्धालुओं का उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा इन क्षेत्रों में आने वाले श्रद्धालुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करने की भी सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।

सिंहस्थ महापर्व में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अच्छी सड़क, पानी, बिजली के अलावा स्वच्छ वातावरण उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी श्रद्धालुओं को देने के उद्देश्य से मंगलनाथ मीडिया सेंटर के माध्यम से साहित्य उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है।

आधी कीमत पर आध्यात्मिक साहित्य की बिक्री
 
सिहंस्थ-2016  में विश्व पुस्तक सप्ताह के अंतर्गत  23  अप्रैल से पुस्तक प्रेमियों को मंगलनाथ जोन में उनकी रूचि का साहित्य आधी कीमत पर मिल रहा है। मेले में  आए श्रद्धालु प्रतिदिन  प्रेरणास्पद आध्यात्मिक साहित्य से भी रू-ब-रू हो  रहे हैं। अखिल भारतीय गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से स्थापित केंद्र इस साहित्य के प्रदर्शन और विक्रय का कार्य कर रहा है।

प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर न सिर्फ साहित्य खरीदते हैं, बल्कि मित्रों, रिश्तेदारों  को जन्म-दिवस और विवाह वर्षगांठ जैसे शुभ अवसर पर उपहार में देने के लिए अतिरिक्त प्रतियाँ ले रहे हैं। केंद्र में गायत्री परिवार के प्रमुख श्रीराम  शर्मा आचार्य की लिखी वो पुस्तिकाएं लोकप्रिय हो रही हैं जो आचार्य जी ने अपने सक्रिय जीवन में निरन्तर लिखीं। वर्ष 2011  में गायत्री परिवार ने  इन पुस्तिकाओं के भारतीय भाषाओं में अनुवाद का महत्वपूर्ण कार्य भी किया  था।  भारत में स्थित सैकड़ों गायत्री मंदिर परिसर इन पुस्तिकाओं की स्थायी प्रदर्शनी संचालित करते हैं। भारतीय भाषाओं में ऐसा उपयोगी  साहित्य अब उज्जैन में आगामी 22  मई तक उपलब्ध रहेगा।  'शिक्षा ही नहीं विद्या भी' और  'ईश्वर  का परम प्रसाद-प्रखर प्रज्ञा'  पुस्तिकाएँ  बड़ी संख्या में बिक रही  हैं।

गीता के उपदेश सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक

बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविद ने कहा है कि श्रीमद भागवत गीता के उपदेश सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक है। गीता के उपदेश मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं। उपदेशों को अपनाने से मानव का जीवन सार्थक होता है। श्री कोविद उज्जैन के सिंहस्थ में स्वामी उत्तम महाराज के पण्डाल में पाँच दिवसीय गीता महोत्सव को सम्बोधित कर रहे थे।

राज्यपाल कोविद ने कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीमद् भागवत गीता का महत्वपूर्ण स्थान है। गीता के उपदेशों से मनुष्य को निष्काम भाव से कर्म करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कर्म करते हुए फल की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। गीता में आत्मा के महत्व को बताया गया है कि वह अजर-अमर है। आत्मा कभी नष्ट नहीं होती केवल शरीर नष्ट होता है। जिस तरह से व्यक्ति वस्त्र पुराने हो जाने पर नये वस्त्र धारण करता है उसी तरह आत्मा भी पुराने वस्त्र रूपी शरीर को छोड़कर नये शरीर में प्रवेश करती है।

राज्यपाल ने कहा कि गीता में भगवान कृष्ण ने बताया कि मनुष्य जिस रूप में भी मुझे जानता है मैं उसी रूप में दर्शन देता हूँ। गीता का लगभग 600 भाषा में अनुवाद हुआ है। गीता के अध्ययन से जीवन का उद्धार होता है। गीता में हिन्दु, जैन, बौद्ध सिख धर्म के मतों का समन्वय है। उन्होंने कहा कि गीता सबके लिये मुक्ति का दरवाजा खोलती है और यह गृहस्थों का उप.निषद है।

डॉ. सत्यनारायण जटिया ने कहा कि गीता के विचारों को जीवन में उतारना चाहिये। गीता सुखी जीवन का आधार हैं। माँ कनकेश्वरी देवी ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रकट हुई है। गीता में सम्पूर्ण अध्यात्म है और उसके उपदेश सुखी जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

भगवत शरण माथुर ने गीता से मनुष्य के दूर होने एवं गीता के व्यवसायीकरण पर चिन्ता जताई। उन्होंने बताया कि नर्मदे हर न्यास गीता और उसके ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कार्य कर रहा है। माथुर ने राज्यपाल कोविद, स्वामी उत्तम महाराज और माँ कनकेश्वरी देवी को स्मृति-चिन्ह भेंट किये।

सिंहस्थ में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल

उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ महाकुंभ में एकता, भाईचारा, साम्प्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनेक मिसाल देखने को मिल रही हैं। एक ऐसा अदभुत उदाहरण नागदा-उन्हेल रोड पर देखने को मिला, जब मुस्लिम धर्मावलम्बियों ने सिंहस्थ में पधारे साधु-संतों का गर्मजोशी के साथ तहेदिल से स्वागत और सम्मान किया।

कार्यक्रम उज्जैन के जामिया अरबिया सिराजुल उलूम और जमीयत उलमा-ए-हिन्द द्वारा किया गया था। इस आध्यात्मिक समागम में हिन्दू और मुस्लिम धर्म-गुरूओं ने शिरकत की। कार्यक्रम में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र गिरि महाराज, महामंत्री श्री हरिगिरि महाराज, निर्मोही अखाड़े के श्री राजेन्द्र दास महाराज, योगी दुष्यंत सहित सिंहस्थ में पधारे अन्य साधु-संतों का आयोजक संगठन सहित अन्य संस्थाओं और मुस्लिम धर्मावलम्बियों ने स्वागत और सम्मान किया। जामिया अरबिया सिराजुल उलूम के बच्चों ने कुरान की आयतें पढ़ी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र गिरि महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने के मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सबकी मंजिल एक ही है। इसके लिये हमें एक-दूसरे की उपासना पद्धति का आदर करना चाहिए। भ्रम फैलाने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।

महामंत्री श्री हरिगिरि महाराज ने साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाने की इस पहल के लिये आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सार शांति-एकता एवं भाईचारा ही है। हम सब मिलकर एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी और आचार-विचार को आत्मसात कर राष्ट्र की उन्नति में मददगार बने।

आयोजक हाफिज मोहम्मद तकी अफी अना ने कहा कि हमारा मकसद हिन्दुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को कायम रखना है। उन्होंने कहा कि सभी धर्म प्रेम एवं सदभाव से रहना सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि सब सदभावना के साथ रहें, जिससे देश का विकास तेजी से हो। नई दिल्ली से आए मौलाना अब्दुल रशीद साहब दोस्तम ने कहा कि हम सबको अच्छे कर्म करना चाहिए और बुरे कर्मों से हमेशा बचना चाहिए। बुरे कर्मों का नतीजा कभी भी अच्छा नहीं होता है।

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