10-Dec-2018

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मैंने उज्जैन में जीते जी स्वर्ग देखा

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एक सिंहस्थ यात्री की डायरी

देश के अन्य प्रांतों से आए श्रद्धालु सिंहस्थ की बेहतर व्यवस्थाओं के लिए मध्यप्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में महाराष्ट्र के एक यात्री ने अपने उज्जैन आगमन को न सिर्फ विशिष्ट अनुभव बताया बल्कि अपने विचार व्यक्त करते हुए  यह तक कहा कि 'उन्हें जीते जी स्वर्ग क्या है, इसका अहसास हो गया है।' उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2016 में उन्हें  नासिक, हरिद्वार और प्रयाग के कुंभ से बेहतर इंतजाम देखने को मिले हैं।

यह यात्री हैं-महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के इचलकरंजी के निवासी मोहन जी केशव पोटे। श्री पोटे ने अपने अनुभव डायरी में लिखे हैं। अनुरोध करने पर श्री पोटे  ने डायरी के वे पन्ने  उपलब्ध भी करवाए  जिसमें  उन्होंने ब्यौरा लिखा है। श्री पोटे ने जो लिखा है, वह उन्हीं के शब्दों में इस प्रकार है:- 'उज्जैन सिंहस्थ में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रशासन से जुड़े लोगों ने इतने अच्छे इंतजाम किए हैं कि  श्रद्धालुओं को कहीं  दिक्कत नहीं होती। मैं जब पत्नी के साथ उज्जैन रेल्वे स्टेशन पहुँचा, तब जगह-जगह सिंहस्थ-2016 के पोस्टर देखने को मिले, जिसमें मुख्यमंत्री का यात्रियों के लिए संदेश देखकर सुखद लगा। इस प्राचीन तीर्थ क्षेत्र में लगभग दो साल पहले शहर के आसपास की भूमि सिंहस्थ क्षेत्र के लिए लेने के बाद भू-स्वामियों को पर्याप्त मुआवजा राशि देने की जानकारी मिली।

मेले के लिए जमीन के समतलीकरण, छोटे-बड़े पंडाल स्थापित करने के लिए सुविधा, जरूरत के अनुसार टायलेट और बाथरूम की व्यवस्था करना तारीफ की बात है। यही नहीं करीब 20 किलोमीटर इलाके में सेक्टर बनाकर, नए विद्युत खंबे लगाने और जल आपूर्ति करना सरकार की नेक- नीयत का प्रतीक है। सरकार का लक्ष्य सभी श्रद्धालु यात्री, साघु-संत आदि को सुविधा प्रदान करना है। आने-जाने के रास्ते साफ-सुथरे दिख रहे हैं। ट्रेफिक के लिए जरूरी संकेत लगाए गए हैं। सफाई कामगार लगातार काम करते दिख रहे हैं। मैं कई घाटों पर घूमा, सभी साफ-सुथरे लगे। कहीं कचरा पाए जाने पर किसी भी नागरिक के बताने पर सफाई कामगार तुरंत कार्यवाही करते हैं। क्षिप्रा नदी के बहाव में भी कचरा उठाने के लिए अलग नाव घूमती रहती है। स्नान कर रहे लोगों के साथ कोई हादसा न हो, इसलिए सुरक्षा गार्ड, मोटरबोट सहित ड्यूटी पर रहते हैं। सुरक्षा कर्मचारी पूरा मार्गदर्शन देते हैं, फायर फायटर, पुलिस बल, एम्बुलेंस, अस्पताल, हेल्प लाइन नंबर और बाकी सरकारी कार्यालय अच्छी तरह काम कर रहे हैं।' मुझे उज्जैन शहर साफ-सुथरा देखकर स्वर्ग माफिक लगा। जैसे कि मैंने जीते जी उज्जैन में स्वर्ग देखा।'

पोटे ने डायरी में यह भी लिखा है कि:- 'इस कुंभ मेले में जो 12 साल में एक बार आता है, क्षिप्रा नदी में इतनी दूरी से पानी लाकर प्रवाहित करना श्रद्धालुओं की भावना का सम्मान है। मैं इन सभी इंतजाम करने वालों को दिल से बधाई देना चाहता हूँ।' पोटे की डायरी के ये अंश पढ़कर सिंहस्थ में उमड़े श्रद्धालुओं के जन-सैलाब की वजह भी स्वत: स्पष्ट हो जाती है ।

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