05-Apr-2020

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एमपी में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देकर संकट टालेगी सरकार

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भोपाल। मध्य प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति का सिलसिला शुरू होने में डेढ़ माह शेष हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने अपनी खराब माली हालत और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कामकाज पर पड़ने वाले असर को देखते हुए सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देने पर विचार शुरू कर दिया है।

संविदा नियुक्ति लेने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला फंड तत्काल नहीं मिलेगा, जिससे सरकार की माली हालत पर भी असर नहीं पड़ेगा और दफ्तरों का काम भी प्रभावित नहीं होगा। मप्र का पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए मप्र में पदोन्नति पर रोक लगी है। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा था तो शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा दो साल बढ़ाकर 62 साल कर दी थी। दो साल की यह अवधि मार्च में खत्म हो रही है। यानी 31 मार्च को प्रदेशभर में चार हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी एक साथ रिटायर होने वाले हैं।

पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में रखा गया था प्रस्ताव

ऐसे में संकट से निपटने के लिए रिटायर कर्मियों को पहली बार एक साल के लिए संविदा पर रखा जा सकता है। इसके बाद अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। संविदा अवधि समाप्त होने के बाद सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले फायदे सामान्य दर से ब्याज के साथ देने पर भी विचार चल रहा है। रिटायरमेंट उम्र 65 करने पर विचार पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 साल करने का प्रस्ताव रखा था।

बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की बजाय विकल्पों पर मंथन हुआ। यहां सरकार ने मार्च के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देने के संकेत दिए हैं। सरकार यह व्यवस्था अगले एक साल जारी रख सकती है। इतने में पदोन्नति में आरक्षण मामले का फैसला आता है या सुप्रीम कोर्ट सशर्त पदोन्नति देने की मांग मंजूर करता है, तो ठीक, वरना संविदा अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।

आठ हजार कर्मचारी रिटायर्ड होंगे

राज्य कर्मचारी आयोग सदस्य वीरेंद्र खोंगल ने कहा कि मार्च से दिसंबर 2020 तक प्रदेशभर से करीब आठ हजार अधिकारी-कर्मचारी रिटायर्ड हो जाएंगे। इसका सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ेगा, क्योंकि इन पदों पर काम करने वाले नहीं हैं। इसलिए सरकार को युवाओं का भविष्य और कर्मचारी हित दोनों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।

साभार- जागरण

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