21-Jul-2018

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महर्षि पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय को करें समृद्ध

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चौहान ने लिया स्वामी रामभद्राचार्य से आशीर्वाद
 
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धर्मपत्नी श्रीमती साधनासिंह के साथ मंगलनाथ जोन स्थित पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के आश्रम में पहुँचकर उनका आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री ने स्वामी जी को शाल-श्रीफल भेंट किया। स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि उज्जैन स्थित महर्षि पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय को समृद्ध करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संस्कृति का पुनर्मूल्यांकन करें। इस संबंध में वे पूरा सहयोग करेंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि स्वामी जी के सुझावों पर अमल किया जाएगा। स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी ने मेला क्षेत्र में की गई उत्तम व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री को श्री रामचरित मानस और हनुमान चालीसा की व्याख्या भेंट की। स्वामी जी ने उपनिषद, गीता और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखा हैं। उन्होंने पाणिनी पर भी ग्रन्थ लिखे हैं। इस दौरान डॉ. कुमारी गीता देवी मिश्रा भी उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री ने देखे दिव्यांगों द्वारा बनाए चित्र

मुख्यमंत्री ने दिव्यांगों द्वारा बनाये गये चित्रों की प्रदर्शनी देखी। प्रदर्शनी जगदगुरू रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट के विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई है।

मुख्यमंत्री ने माधवसेवा न्यास और भारत माता मंदिर पहुँचकर श्री भैया जी जोशी से भी भेंट की।

भारतीय परंपरा और आध्यात्म के प्रति आकर्षित हो रहे विदेशी ब्राजील की रीएल बनी सत्या

उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ में भारतीय परंपरा और आध्यात्म के प्रति विदेशी श्रद्धालु, सहज ही आकर्षित हो रहे हैं। कोई मोक्षदायिनी क्षिप्रा में आस्था की डुबकी लगा रहा है, कोई भजन-कीर्तन कर खुश हैं, तो कोई ध्यान-योग में शांति प्राप्त कर रहा है। सिंहस्थ में पहुँचे स्पेन, अमेरिका, ब्राजील और यूक्रेन से आये श्रद्धालुओं से मिलने और चर्चा में यह बात सामने आई है। विदेशी श्रद्धालु राज्य सरकार द्वारा मेला क्षेत्र में की गई व्यवस्थाओं की भी मुक्त-कंठ से सराहना कर रहे हैं।

स्पेन के बार्सीलोना के ग्रेजुएट 30 वर्षीय श्री स्टेफेनो और 23 वर्षीय श्री आयटर कहते हैं कि- 'कुम्भ' का पवित्र आयोजन और इसके लिये सरकार द्वारा की गई व्यवस्था 'फेन्टास्टिक हैं।' उज्जैन बहुत साफ-सुथरा शहर है। कुम्भ में आकर उन्हें सुखद अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों की सामाजिक और धार्मिक समरसता तथा सहिष्णुता की भावना सराहनीय है।'

अमेरिका के केलिफोर्निया राज्य के सेनफ्रान्सिस्को निवासी श्री क्रस्टन क्षिप्रा में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ पवित्र डुबकी लगाकर शांति अनुभव कर रहे थे। श्री क्रस्टन ने कहा कि- 'कुम्भ में आकर वे शान्ति, सुख और खुशी महसूस कर रहे हैं।'

ब्राजील के साओपाउलो की सिविल इंजीनियर सुश्री रीएल अपनी नौ साथियों सुश्री ब्रूना, सुश्री येदू, सुश्री नाईस, सुश्री क्रिस, सुश्री आना, सुश्री मास्या, सुश्री सारा, सुश्री कारोल तथा सुश्री सिबंदा के साथ सिंहस्थ में पहुँची। रीएल तो स्थानीय सिद्धाश्रम के माध्यम से ध्यान से जुड़कर इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने अपना नाम बदलकर 'सत्या' रख लिया। उन्होंने बताया कि- 'क्षिप्रा के घाट बहुत सुंदर, रमणीय और साफ-सुथरे हैं। यहाँ रोशनी की व्यवस्था आकर्षक है।' उन्होंने परिवहन, आवास और अन्य व्यवस्थाओं की भी तारीफ की।

यूक्रेन के कीव के श्री आंद्रे रूदेमक और ब्लादमिर ज़ूरवलो दत्त अखाड़ा घाट पर ताली बजाते हुए कीर्तन करते मिले। उन्होंने कीर्तन के बाद प्रसाद ग्रहण कर साधु-संत के चरण स्पर्श किये तथा बताया कि- 'भारत की विविधता और एकता सराहनीय है। कुम्भ का विशेष पर्व और भारत की पूजा-पद्धतियाँ उन्हें हमेशा ही आकर्षित करती रही हैं। ध्यान, आत्मा और परमात्मा की भारतीय अवधारणा में उनकी गहरी रुचि है।' उन्होंने यहाँ की व्यवस्था को 'वेरी गुड' रिमार्क दिया ।

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