02-Apr-2020

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कैबिनेट के निर्णय को मुख्य सचिव बदल दे तो कैबिनेट को इस्तीफा दे देना चाहिए: शिवराज सिंह

पोषण आहार व्यवस्था को निजी फर्मो को देकर जनता के पैसे की बंदरबाट करने के कुत्सित प्रयास में है सरकार

कैबिनेट और कैबिनेट के बाद हुए पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण दे मुख्यमंत्री

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने आज पत्रकार साथियों से चर्चा में प्रदेश में पोषण आहार व्यवस्था को निजी फ़र्मों को देने के लिए चल रहे कुत्सित प्रयासो के साक्ष्य साझा किए। उन्होने बताया कि हमारी भारतीय जनता पार्टी कि सरकार ने दिनांक 13 मार्च 2018 को कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया था कि टेकहोम राशन का कार्य महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से किया जायेगा। इसके लिए 07 आटोमेटिक संयन्त्र राज्य में स्थापित किये जाएंगे साथ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार हमने पोषण आहार व्यवस्था से ठेकेदारों, प्राईवेट फर्मो का काम स्व सहायता समूहों को देना उन्हें सशक्त बनाया जायेगा। श्री चौहान ने बताया कि इसके लिए सरकार द्वारा लगभग 110 करोड़ की राशि से प्लांटो का निर्माण किया गया। लाभ की राशि में से महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिला सशाक्तिकरण का कार्य होता। प्लांटों द्वारा अर्जित शुद्ध लाभ में से 90 प्रतिशत राशि आजीविको मिशन को जाती जिसमें से 50 प्रतिशत राशि राजकीय कोष में और 50 प्रतिशत स्वसहायता समूहों को महिला सशाक्तिकरण हेतु प्रदाय की जाती है। यह भाजपा सरकार का निर्णय था।

चौहान ने कांग्रेस सरकार के कुत्सित प्रयासो को उजागर करते हुए बताया कि 27-11-19 को सम्पन्न कैबिनेट की बैठक में पंचायत ग्रामीण विकास विभाग की तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के हस्ताक्षरों से संक्षेपिका रखी गयी। संक्षेपिका में निर्णय प्रारूप के क्रमांक 11 पर लिखा था- ‘‘यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एम.पी.एग्रो किसी भी रूप में निजी संस्था ठेकेदार या आऊट सोर्स एजेंसी को टेकहोम राशन उत्पादन/संचालन के कार्य में सम्मिलित नहीं करेगा। मंत्रि-परिषद की बैठक दिनांक 27.11.2019 को उपरोक्त बिन्दु यथावत निर्णय में  पारित किया गया। 

चौहान ने आगे बताया कि इस कैबिनेट कि बैठक के पश्चात भ्रष्टाचार, काली कमाई, खराब नियत वाले अफसरों ओर जन नेताओं के नापाक गठबंधन की कहानी शुरू होती है। कैबिनेट के निर्णय के बाद मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को एक नोटशीट भेजी जिसमें लिखा गया कि विभागीय संक्षेपिका दिनांक 26.11.2019 की कंड़िका 13 की उपकंड़िका 1 से 10 तथा 12 से 15 का अनुमोदन किया जावें और इसको मानकर अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने दिनांक 16.01.2020 को एक आदेश क्रमांक 280 जारी कर दिया जिसमें से कैबिनेट द्वारा 27.11.2019 को पारित निर्णय की कंड़िका 10 को विलोपित कर दिया। 
चौहान ने पत्रकारों के साथ चर्चा में कहा कि ऐसी अजब-गजब सरकार तो मैंने पहले कभी नहीं देखी है। कैबिनेट के फैसले को मुख्य सचिव ने उड़ा दिया मंत्रियों अधिकारियों के साथ ठेकेदार गठजोड़ कर जनता के पैसे की बंदरबांट करने के प्रयासो में जुटे है। यह मनमानी नहीं चलने दी जायेगी। मुख्यमंत्री जी, ऐसे सभी अनुत्तरित सवालों का जवाब देना होगा। उन्होने मुख्यमंत्री कमलनाथ जी से निम्न सवालो पर स्पष्टीकरण और जवाब मांगे है।
1.क्या यह सच है कि वित्त और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, दोनो ने प्रस्ताव दिया था कि पोषण आहार का कोई निजीकरण नहीं होना चाहिए?
2.क्या यह सच है कि कैबिनेट में भी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई ?
3.क्या यह सच है कि तत्कालीन ए.सी.एस. गौरी सिंह ने कैबिनेट में विधिवत रूप से अपना पक्ष सरकार के समक्ष रखा ?
4.क्या सह सच है कि निजी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया, लेकिन बाद में रिकार्ड में इसे बदल दिया गया। क्या कारण रहा इसे बदलने का ?
5.क्या सह सच है कि इस तरह से निर्णय को हेरफेर कर बदलने से निजी कंपनियों को फायदा होगा? 
6. क्यों राज्य के मुख्य सचिव ने, गलत तरीके से कैबिनेट के निर्णय को बदल दिया?
7.क्या यह उच्च न्यायालय के निर्देशों के उल्लंघन का कुटिल प्रयास नहीं है?
8.क्या यह सच है कि भ्रष्टाचारी अफसरों, ठेकेदारों के दबाव में ही आपकी सरकार ने ईमानदार और कर्तव्य निष्ठ अफसर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर मजबूर किया।
पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने राज्यपाल को प्रदेश में पोषण आहार व्यवस्था के बदलाव के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा किए जा रहे कुत्सित प्रयासो को संज्ञान में लेकर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

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