12-Dec-2017

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आचार्य बालकृष्ण के टिप्स: इन हर्ब्स के इस्तेमाल से दूर होगी हर यौन समस्या

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आयुर्वेद में हर तरह के रोगों का उपचार मौजूद होता है। प्राकृतिक हर्ब्स के इस्तेमाल से हर तरह के रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। यूं तो बाजार में यौन रोगों के उपचार के लिए तमाम उपचार मौजूद हैं लेकिन अगर आप बिना किसी साइड इफेक्ट के सुरक्षित तरीके से इन रोगों का उपचार चाहते हैं तो आपको आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं विख्यात आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण द्वारा बताए गए यौन रोगों के उपचार के लिए तमाम आयुर्वेदिक नुस्खों को लेकर, जिनका इस्तेमाल आपको इन रोगों से पूर्णतः मुक्ति दिला सकता है।

बथुआ के इस्तेमाल से – जिन लोगों को यौन दुर्बलता की शिकायत होती है वे लोग 20 ग्राम बथुआ के बीज को 400 ग्राम पानी के साथ उबाल लें। पानी जब केवल 50 ग्राम बच जाए तब इसे आंच पर से उतार लें। अब इसे गुनगुना होने तक ठंडा करें। अब इसमें थोड़ा शहद मिला लें। इसका नियमित रूप से सेवन करें। इससे यौन दुर्बलता, नपुंसकता और यौन जनित रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इसके बीजों को पीसकर उसकी पांच ग्राम मात्रा को पानी के साथ रोज लेंगे तो इससे भी यौन जनित विकृतियां दूर होती हैं।

मालकांगनी के इस्तेमाल से – मालकांगनी एक अत्यंत पौष्टिक आयुर्वेदिक वनस्पति है। इसके 2-3 बीजों को सुबह नाश्ते के समय खाली पेट चबाकर खाएं और बाद में दूध या फिर पानी पी लें। इससे शरीर में ताकत और स्फूर्ति का संचार होता है। इसकी तासीर बहुत गर्म होती है इसलिए ज्यादा मात्रा में इसका सेवन न करें। इसके सिर्फ दो या तीन बीजों का सेवन करना चाहिए।

भांग के इस्तेमाल से – ऐसे लोग जिन्हें नपुंसकता की शिकायत है वे लोग भांग के बीजों को भूनकर या पीसकर उसका पाउडर बना लें। अब इसके एक-एक चम्मच पाउडर का सेवन प्रतिदिन करें। इससे आंतरिक शक्ति बढ़ती है तथा नपुंसकता भी दूर होती है।

अकरकरा के इस्तेमाल से – कमजोरी और धातु रोगों के उपचार में अकरकरा का प्रयोग बहुत ही लाभकारी होता है। इसके लिए अकरकरा की 100 ग्राम जड़, 100 ग्राम शतावर और मुसली के पाउडर के साथ मिलाकर एक चम्मच रोज सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करें। इससे धातु क्षीणता और शारीरिक कमजोरी दूर होती है। साथ ही साथ चेहरे की चमक भी बढ़ती है।

कौंच के बीज के इस्तेमाल से – कौंच का बीज आपको बाजार में आसानी से मिल सकता है। ऐसे पुरुष जिन्हें धातु क्षीणता की शिकायत है या फिर स्वप्नदोष की परेशानी है वे लोग आधा किलो कौंच के बीज की पोटली बनाकर उसे दो किलो दूध में पकाएं। ध्यान रहे कि पोटली बर्तन से न छूने पाए। कौंच के बीज जब ठीक तरह से पक जाएं तो उसका छिलका उतार लें। अब इस बीज को 250 ग्राम अकरकरा के फूल और 100-150 ग्राम तुलसी के बीज तथा मिश्री के साथ मिलाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर का सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें। इससे शारीरिक शक्ति बढ़ती है और शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है।

साभार- जनसत्‍ता

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