21-May-2018

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पंक्ति के अन्तिम व्यक्तियों पर पुष्प-वर्षा कर धन्य हुआ

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पंचक्रोशी यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं पर मुख्यमंत्री ने की पुष्प-वर्षा


सिंहस्थ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 118 किलो मीटर पैदल पंचक्रोशी की यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं पर सोडंग ग्राम में लगातार पुष्प-वर्षा कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री चौहान ने इस मौके पर कहा कि जनता-जनार्दन पर पुष्प-वर्षा कर मैं धन्य हो गया हूँ। वैसे तो उज्जयिनी त्रिलोक से न्यारी नगरी है, फिर भी यहाँ पंचक्रोशी यात्रा का अपना विशेष महत्व है। यात्रा में शामिल हुई जनता साधक है और यही सिद्ध है।

पुष्प-वर्षा कर गदगद हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री चौहान ने पुष्प-वर्षा करने के बाद पंचक्रोशी यात्रा की महा रैली में जाकर यात्रियों से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया। यात्रा में शामिल हुए श्रद्धालुओं से बात कर उनके अनुभव पूछे। यात्रा में शामिल कई बुजुर्गों को देखकर उन्होंने शीश नवाकर अभिवादन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

सान्दीपनि आश्रम जहाँ श्रीकृष्ण को मिली 64 कला की शिक्षा

भागवद् गीता के माध्यम से पूरे विश्व को कर्म योग की शिक्षा देने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के महर्षि सान्दीपनि व्यास के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। जिस काल में श्रीकृष्ण यहाँ विद्याध्ययन के लिए आए थे, उस समय उज्जैन नगरी को अवन्तिका के नाम से जाना जाता था।

यहाँ देश-देशान्तरों से लोग पढ़ने आया करते थे। अवन्तिका, तक्षशिला और नालन्दा की भांति ही, ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति की संगम-स्थली थी। वासुदेवजी ने श्रीकृष्ण का यज्ञोपवीत संस्कार कर उन्हें अपने ज्येष्ठ बन्धु हलधर बलराम और मित्र सुदामा के साथ यहाँ ज्ञान लेने और गुरूकुल का आश्रम जीवन व्यतीत करने के लिए भेजा था।

श्रीकृष्ण ने महर्षि सान्दीपनि से 14 विधा और 64 कला के अलावा धनुर्वेद, अस्त्र, मंत्रोपनिषद की शिक्षा 64 दिन में, गज एवं अश्व शिक्षा 12 दिन में और वेदों की शिक्षा 50 दिन की अल्प अवधि में ही प्राप्त कर ली थी। सान्दीपनि आश्रम उज्जैन के अंकपात क्षेत्र में हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के लिखने की पट्टियों को धोकर अंक मिटाये जाते थे, इसलिए इसका नाम अंकपात पड़ा। यहाँ गोमती सरोवर कुण्ड, कुण्डेश्वर महादेव मंदिर, श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा और महर्षि सान्दीपनि की प्रतिमाएँ हैं। सान्दीपनि आश्रम मेला क्षेत्र में मंगलनाथ जोन में स्थित है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

बाल संत बालशुक के प्रवचन में बढ़ रहे श्रद्धालु

सिहंस्थ महापर्व के दौरान उज्जैन मेला क्षेत्र के मंगलनाथ जोन में बाल-संत बालशुक व्यास पान्ड्रिक कृष्णजी महाराज के प्रवचन सुनने काफी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। महाराज के नियमित प्रवचन महामण्डलेश्वर गंगादास महाराज जालंधर के आश्रम में हो रहे हैं।

बाल-मुख से बह रही भक्ति रस की धारा से श्रद्धालु मंत्र-मुग्ध हो रहे हैं। श्रद्धालु अचंभित भाव से बालशुक व्यास के प्रवचन सुनते हैं। उनको यह विश्वास ही नहीं होता कि इतना छोटा बालक इतना ज्ञानवान हो सकता है।

सिंहस्थ के दूसरे शाही-स्नान की तैयारियाँ

विश्व के सबसे बड़े धार्मिक-आध्यात्मिक समागम सिंहस्थ में 9 मई को दूसरा शाही स्नान है। प्रशासन एवं मेला प्रबंधन द्वारा दूसरे शाही स्नान की तैयारियों को सुनियोजित रूप से अंजाम दिया जा रहा है। इस सिलसिले में संभाग आयुक्त रविन्द्र पस्तौर ने आज झोनल कार्यालय, दत्त अखाड़ा में सिंहस्थ प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने कहा व्यवस्थाओं को इस तरह अंतिम रूप दें, जिससे शाही स्नान के दिन साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो।

संभाग आयुक्त पस्तौर एवं पुलिस महानिरिक्षक श्री मधुकुमार ने सेक्टर मजिस्ट्रेट तथा पुलिस अधिकारियों को हिदायत दी कि अखाड़ों के सतत् सम्पर्क में रहकर पहले से ही यह पता कर लें कि शाही.स्नान के दिन किस अखाड़े में कितने वाहन शामिल रहेंगे, जिससे आवागमन व्यवस्था को बेहतर ढंग से अंजाम दिया जा सके। श्री पस्तौर ने यह भी कहा कि कौन सा अखाड़ा किस समय शाही-स्नान के लिये निकलेगा, इसकी भी सही-सही जानकारी रखें। उन्होंने शाही-स्नान के लिये निकलने वाले हर अखाड़े के पीछे सफाई दल नियुक्त करने के निर्देश भी दिये। साथ ही कहा कि सफाई व्यवस्था में किसी तरह कि ढिलाई न हो।

पस्तौर ने साधु-संतो के सम्मान और गरिमा का ध्यान रखने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा ही कहा मेले से जुड़े अमले का श्रद्धालुओं के साथ सहज और संवेदनशील बर्ताव होना चाहिए।

सिंहस्थ महाकुंभ स्नान की आगामी तिथियाँ

सिंहस्थ महाकुंभ उज्जैन में मोक्षदायिनी क्षिप्रा में स्नान पर आने वाले श्रद्धालु क्षिप्रा में अमृत स्नान का लाभ आगामी स्नान पर्व वैशाख कृष्ण पक्ष 30 (6 मई 2016), स्नान पर्व अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल पक्ष 3 सोमवार (9 मई 2016), शंकराचार्य जयंती वैशाख शुक्ल पक्ष 5 बुधवार (11 मई 2016), वृषम संक्रान्ति पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष 9 (15 मई 2016), मोहिनी एकादशी पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष 11 मंगलवार (17 मई 2016), प्रदोष पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष 13 (19 मई 2016), नृसिंह जयंती पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष 14 शुक्रवार (20 मई 2016) तथा प्रमुख स्नान वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा (21 मई 2016) को प्राप्त कर सकते हैं।

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