20-Sep-2018

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सदी के दूसरे सिंहस्थ का अंतिम शाही स्नान आज

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  • लाखों श्रद्धालु पावन क्षिप्रा में लगाएंगे आस्था और विश्वास के साथ डुबकियाँ

  • दत्त अखाड़ा व रामघाट पर प्रात: 3 बजे स्नान के लिए पहुँचेंगे शैव एवं वैष्णव अखाड़े

 
सदी के दूसरे महाकुंभ के तीसरे व अंतिम शाही स्नान के पावन प्रसंग पर आज 21 मई वैशाख शुक्ल पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु मोक्षदायिनी क्षिप्रा में आस्था और विश्वास की डुबकियाँ लगाएंगे। अखाड़ों का शाही स्नान प्रात: 3 बजे से प्रारंभ होगा। सिंहस्थ में पहली बार दत्त अखाड़ा घाट पर शैव अखाड़ों के नागा सन्यासियों का स्नान प्रात: 3 बजे से प्रारंभ होगा। वहीं इसी समय रामघाट पर वैष्णव अखाड़े स्नान करेंगे। शाही स्नान सुबह 3 बजे से 11 बजे तक निर्धारित क्रमानुसार विभिन्न अखाड़ों के साधु, संत स्नान करेंगे। सिंहस्थ में यह पहला अवसर रहेगा जब रामघाट व दत्त अखाड़ा घाट पर शैव व वैष्णव सम्प्रदाय के साधु सन्यासी एक ही समय में दोनों घाट पर एक साथ स्नान करेंगे। श्रद्धालु इस अलौकिक अवसर का दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे। प्रशासन द्वारा शाही स्नान के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ एवं प्रबंध सुनिश्चित कर लिए गए हैं।

स्नान के दौरान अखाड़ों के आगे-पीछे, दाँये-बाँये घाटों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस और पैरामिलेट्री बल के जवान तैनात रहेंगे। भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था भी सुनियोजित होगी। शाही स्नान के लिए जुलूस मार्ग की धुलाई, चूने की लाइनिंग, मार्ग पर पानी का छिड़काव एवं घाटों पर स्नान के लिए पहुँचे साधु-संतों का परम्परागत तरीके से स्वागत-सत्कार किया जायेगा। शाही स्नान के लिए सभी अखाड़ों के स्नान-क्रम और घाटों पर आने-जाने के लिए मार्ग निर्धारित किये गये हैं।

शैव अखाड़ों का स्नान

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा एवं अग्नि अखाड़े का स्नान प्रात: 3 बजे से, निरंजनी एवं आनंद अखाड़े का स्नान प्रात: 4 बजे से तथा महानिर्वाणी एवं अटल अखाड़े का शाही स्नान प्रात: 5 बजे से प्रारंभ होगा। शैव अखाड़ों के साधु सन्यासियों के स्नान के बाद प्रात: 7 बजे से दत्त अखाड़ा घाट आम श्रद्धालुओं के स्नान के लिए खुला रहेगा।

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा एवं अग्नि अखाड़े का जुलूस अपनी छावनी से रवाना होकर छोटी रपट पर पहुँचकर स्नान कर दत्त अखाड़ा के समीप बने रेम्प से अपने केम्प में पहुँचेगा। निरंजनी अखाड़े एवं आनंद अखाड़े का जुलूस बड़नगर रोड स्थित शिविर से रवाना होकर छोटी रपट होते हुए बाएं चलने के सिद्धांत का पालन करते हुए रोड डिवाइडर के बांयी तरफ जाकर खड़ा हो जाएगा तथा निरंजनी अखाड़े के जुलूस के वापस होने के तुरंत बाद दत्त अखाड़ा में प्रवेश करेगा। यहाँ स्नान के बाद अखाड़ा घाट खाली कर डिवाइडर के दूसरी ओर होते हुए बड़नगर रोड पर शंकराचार्य चौराहे होते हुए वापस अपनी छावनी में पहुँचेगा। महानिर्वाणी एवं अटल अखाड़े का जुलूस बड़नगर रोड स्थित केम्प से रवाना होकर छोटी रपट पर दत्त अखाड़ा घाट के समीप लगे रोड डिवाइडर के बांई ओर आकर खड़ा होगा तथा दत्त अखाड़ा घाट खाली होते ही घाट पर प्रवेश करेगा। स्नान के बाद डिवाइडर के दूसरी तरफ सड़क के बाएं चलने के सिद्धांत का पालन करते हुए वापस अपनी छावनी के लिए रवाना हो जाएगा।

वैष्णव अखाड़ों का स्नान

रामघाट पर वैष्णव अखाड़ों के स्नान की व्यवस्था रहेगी। निर्मोही अणि अखाड़ा का स्नान प्रात: 3 बजे से, दिगम्बर अणि अखाड़े का स्नान प्रात: 4 बजे से एवं निर्वाणी अणि अखाड़े का स्नान प्रात: 5 बजे से रामघाट पर प्रारंभ होगा। सुबह 7.30 बजे तक रामघाट पर वैष्णव अखाड़ों का शाही स्नान पूरा हो जाएगा। रामघाट पर ही उदासीन अखाड़ों का स्नान होगा। रामघाट पर निर्मोही, दिगम्बर एवं निर्वाणी अखाड़ों का स्नान भी प्रात: 3 बजे से प्रारंभ होगा। यह अखाड़े खाकचौक से अंकपात, पटेल नगर, निकास चौराह, कंठाल, सतीगेट, छत्रीचौक, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, रामानुज कोट होते हुए रामघाट पर पहुँचेंगे। स्नान के बाद गंधर्व गेट से दानीगेट, बिलोटीपुरा, जूना सोमवारिया, वाल्मीकि धाम के सामने से पिपलीनाका, अंकपात मार्ग होते हुए यह अखाड़े वापस अपनी छावनी पहुँचेंगे।

उदासीन अखाड़ों का स्नान

बड़ा उदासीन अखाड़ा एवं नया उदासीन अखाड़ा प्रात: 8.30 बजे स्नान के लिए रामघाट पहुँचेगा और 9.30 बजे तक स्नान कर वापस अपनी छावनी में पहुँचेंगे। रामघाट पर निर्मल अखाड़े का स्नान 10 बजे से प्रारंभ होगा और 11 बजे तक स्नान पूर्ण होकर घाट आम श्रद्धालुओं के स्नान के लिए उपलब्ध रहेगा। इस तरह प्रात: 11 बजे से आम श्रद्धालु रामघाट व दत्त अखाड़ा घाट पर पहुँचकर स्नान कर सकेंगे।

अंतिम शाही पर्व में महाकाल के दर्शन करने उमड़ेगा सैलाब

251 रूपये के टिकट से दर्शन किया गया बंद

21 मई को शरद पूर्णिमा के पर तीसरे एवं अंतिम शाही स्नान पर्व के बाद बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक स्वयंभू एवं दक्षिणमुखी महाकाल के दर्शन करने के लिए आने वाले लाखों-लाख श्रद्धालुओं की अपार संख्या को देखते हुये मंदिर प्रबंधन ने 251 रूपये के टिकट से कराया जाने वाला दर्शन बंद कर दिया है। अब समस्त श्रद्धालु साधारण लाइन में लगकर ही महाकाल के दर्शन करेंगे।

समस्त श्रद्धालुओं को आसानी एवं सरलता से महाकाल के दर्शन के लिए व्यापक प्रबंधन किये गये हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन के लिए बड़ी संख्या में जिला पुलिस बल एवं सशस्त्र पुलिस बल को लगाया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उज्जैन पहुँचे, अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों से की भेंट एवं चर्चा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज हेलीकॉप्टर से उज्जैन पहुँचे। उनके साथ राज्यसभा सांसद रघुनन्दन शर्मा भी थे। प्रशासनिक अधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों ने उनकी अगवानी की। मुख्यमंत्री श्री चौहान हेलीपेड से कार द्वारा नृसिंह घाट के सामने स्थित दातार अखाड़ा पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्राचीन शिव मन्दिर में पूजा-अर्चन एवं अभिषेक किया तथा साधु-सन्तों एवं श्रीमहन्तों से चर्चा की। इस मौके पर प्रभारी मंत्री श्री भूपेन्द्रसिंह व अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्री हरिगिरि महाराज भी उपस्थित थे।

आनंद मंत्रालय का गठन स्वागत योग्य : स्वामी हर्षानन्द


उज्जैन सिंहस्थ में आए योग दर्शन परर्माथिक ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी हर्षानन्द ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आनंद मंत्रालय के गठन के निर्णय को स्वागत योग्य बताया है। मंदसौर के भानपुरा में जन्में स्वामी हर्षानन्द ने बताया कि वे पिछले 25 वर्ष से अपने संगठन के माध्यम से योग शिक्षा दे रहे हैं। उन्होंने अब तक देशभर के लगभग 3,500 स्कूल के बच्चों को योग की शिक्षा दी है। उन्होंने बताया कि 192 जेलों के कैदियों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए, उनके द्वारा जेल में शिविर लगाए गए हैं।

स्वामी हर्षानन्द ने कहा कि बच्चों में पानी और पेड़ के प्रति आदर भाव पैदा कर देश के पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि मानव शरीर और पृथ्वी पर 72 प्रतिशत पानी की मात्रा है। यह इस बात का आभास कराता हैं कि पानी का कितना महत्व है। उन्होंने योग के गिद्धासनी आसन के बारे में भी बताया। गिद्ध की प्रवृत्ति होती है आकाश की अधिकतम ऊँचाई पर उड़कर ज़मीन को साफ रखना। उन्होंने अपने प्रशिक्षण के दौरान श्रद्धालुओं को इस आसन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। स्वामी हर्षानन्द ने बताया कि अश्व में भी एक विशेषता होती है वह सांस, ध्वनि और ताल में बेहतर तालमेल रखता है। इस वजह से वह पूरी उर्जा के साथ दौड़ता है।

स्वामी हर्षानन्द ने संयुक्त राष्ट्र संघ में योग दिवस घोषित होने पर दुनियाभर में योग के प्रति जागरूकता लाए जाने के भारत सरकार के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

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