20-Nov-2018

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सिर्फ हमीदिया ही नहीं, प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों को मिली हुई है यमराज की फ्रेंचायजी

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प्रदेश के आईएएस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ, तो प्रभांशु कमल को हटाया क्यों ?
पी.एस. और डीन को सजा देकर बच रही है राज्य सरकार: के.के. मिश्रा

भोपाल 24 दिसम्बर। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने राजधानी के शासकीय हमीदिया अस्पताल में व्याप्त दुरावस्था पर कथित तौर पर चिंतित मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा किये गये औचक निरीक्षण के उपरांत प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य प्रभांशु कमल व डीन डॉ. उल्का श्रीवास्तव को हटाये जाने के निर्णय को महज एक नौटंकी बताते हुए कहा कि समूचे प्रदेश मंे स्वास्थ्य विभाग, जिला अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार के अड्डे बने हुए हैं, जिसे देखते हुए तो यही कहना पर्याप्त होगा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को ‘‘यमराज की फ्रेंचायजी’’ मिली हुई है।

मिश्रा ने कहा कि लोकायुक्त छापों के दौरान डॉक्टरों के घरों सें मंत्री की नोटशीट मिलना, आदिवासी बाहुल्य बड़वानी जिला अस्पताल में आंखों के आपरेशन के दौरान 40 मरीजों की आंखें चली जाना, मरीजों और मृतकों के शवों को चूहों द्वारा कुतरना, जानवरों की सलाईन मरीजों को लगाना, मरीजों को लाने व शवों को ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिलना, मृतक परिवारों द्वारा अपने दिवंगत प्रियजनों के शवों को कई किलोमीटर तक गोद/ कंधे/ हाथ ठेला और साईकिलों पर ले जाना, अमानक दवाओं के वितरण से मरीजों की मौत, गलत इंजेक्शन व ऑक्सीजन की बजाय गलत गैस देने से मासूमों की मौतें, अस्पतालों में दवा नहीं होना, जमीन, चादर-साडि़यों की आड़, चिमनी और टॉर्च की रोशनी में महिलाओं की प्रसूति होना, भ्रष्टाचार के वशीभूत महंगे वेंटीलेटर खरीदना, डॉक्टरों की क्रांफ्रेंस में दवाओं का अवैध रूप से प्रचार करना राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं में आम बात हो चुकी है। शायद, मुख्यमंत्री इससे बेखबर नहीं होंगे!

मिश्रा ने मुख्यमंत्रीको उनके ही गृह-ग्राम ‘जैत’ के नजदीक शाहगंज के सामुदायिक विकास केन्द्र में संचालित अस्पताल की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया है कि यहां राज्य सरकार से कैबीनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त प्रदेश मार्कफेड के अध्यक्ष श्री रमाकांत भार्गव की बेटी और भतीजी डॉ. अमृता और डॉ. नम्रता पदस्थ हैं, जो सिर्फ तनख्वाह ही लेती हैं, दो अन्य डॉक्टर और हैं, जिनका कहीं भी अता-पता नहीं रहता है, क्या इनके विरूद्व भी प्रभांशु कमल और डॉ. उल्का श्रीवास्तव के समान कार्यवाही होगी?

मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में दवा खरीदी में हुए करोड़ों-अरबों रूपयों के घोटालाें, कथित ब्लैक लिस्टेड जिगित्सा हेल्स केयर कंपनी को एम्बुलेंस चलाने के दिये गये ठेकों में हुए भ्रष्टाचार, बड़वानी में 40 लोगों की आंखों की रोशनी छीनने वाली दवा कंपनी बैरल पर 5 साल के लगे हुए वेन को हटते ही 12 करोड़ रूपयों का ठेका दे दिया जाना, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ही सर्वेक्षण में प्रदेश की आधी आबादी में खून की कमी पाया जाना, महालेखाकार की ही रिपोर्ट में प्रदेश के 20 जिलों में 28 करोड़ रूपयों की बिना जांच किये दवाऐं बांट दिये जाने जैसे गंभीर अक्षम्य अपराध भी मुख्यमंत्री की जानकारी में होंगे ही। आखिरकार क्या कारण है कि इतने गंभीर मामलों पर उन्होंने अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की?
 
मिश्रा ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पताल कत्लखाने बने हुए हैं। एक ओर जहां प्रदेश में सरकार बेटियों को बचाने की विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी और निजी अस्पतालों में गर्भपात के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। एमटीपी (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के धार, सीधी, सतना और इंदौर के सरकारी अस्पतालों में गर्भपात के सबसे अधिक मामले सामने आये हैं। केंद्र सरकार से प्राप्त रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार निम्न तालिका से स्थिति स्पष्ट हो जाती है:-

क्र.    स्थान    सरकारी    प्राइवेट
1    धार    1408    457
2    सीधी    1367    00
3    सतना    1323    75
4    इंदौर    1168    04
5    सीहोर    1159    201
6    बड़वानी    1125    04
7    जबलपुर    1081    402
8    उज्जैन    876    608
9    ग्वालियर    1339    1472
10    भोपाल    1584    4084

अपने बयान में उन्होंने कहा कि इन्हीं दुरावस्थाओं के कारण एसोचैन रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद चिकित्सा क्षेत्र पर निवेश के मामले में मध्यप्रदेश 10 वीं रेंक पाकर पिछड़ा हुआ है व एनसीआरबी की रिपोर्ट के ही आधार पर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 52 आंकी गई है।

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