21-Jul-2018

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प्रशिक्षण महाअभियान के दूसरे दिन कार्यकर्ताओं को मिला विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन

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इंदौर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महा अभियान के तहत यहां आयोजित प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग में आज 5 सत्रों में वक्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यसमिति का मार्गदर्शन किया। प्रशिक्षण वर्ग के दूसरे दिन पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री व्ही. सतीश, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नंदकुमारसिंह चैहान, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत ने अपने विचार व्यक्त किए।

प्रथम सत्र में सुहास भगत ने कहा के कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण संगठन की सतत प्रक्रिया है क्योंकि मनुष्य के जीवन में विकास की अनंत संभावनाएं हैं इसलिए ऐसे वर्गों में यह चिंतन एक प्रक्रिया के तहत चलता है। जीवन में नए-नए आयामों के तहत सुनने और समझने की क्षमता विकसित होती हैं। समय के अनुसार विषय बदलते हैं और उसी के अनुसार प्रशिक्षण अत्यावश्यक हो जाता है।भारतीय जनता पार्टी आज जब सत्ता में है तब कार्यकर्ता को सोचना है कि समाज जीवन में कैसा व्यवहार करना चाहिए। यह प्रशिक्षण से ही सीखा जा सकता है। आज कार्यकर्ता का दायित्व है कि जब वह सरकार में है तो जनता के हित में जो भी योजनाएं बनती हैं उन्हें पूरी संवेदनशीलता के साथ जन-जन तक ले जाये। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता को अपने  सोचने का दायरा व्यापक करना है। सभी अन्य कार्यकर्ताओं को और संपूर्ण समाज को साथ लेकर चलने की प्रवृत्ति विकसित करना चाहिए। सबको साथ लेकर चलना और सबके साथ चलना ,ऐसी साधना जीवन में रखना अत्यावश्यक है, क्योंकि हम सांस्कृतिक मूल्यों पर अवलंबित राजनीतिक दल के कार्यकर्ता है। समाज को सकारात्मकता से ही बदला जा सकता है। यदि हमारी वैचारिक स्पष्टता रहेगी तो सही मायने में सत्ता का लाभ आम जनता को मिल सकेगा। दीनदयाल जी जिस अंत्योदय की बात करते हैं वह फलीभूत हो सकेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से तकनीकी रुप से हो रहे नवाचारों को समझने की  अपील की। इन नवाचारों के द्वारा आम आदमी के हित में कितनी तेजी से काम किया जा सकता है इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम यह गौरव के साथ कह सकते हैं कि हम ही एकमात्र राजनीतिक दल हैं जो कभी टुकड़े नहीं हुआ, चाहे वामपंथी रहे हो या कांग्रेस, उनके भीतर विभाजन की घटना बहुत स्पष्ट रूप से हुई है। इसका कारण मात्र इतना है कि हम व्यक्ति आधारित नहीं विचार आधारित संगठन है। इसलिए हमारे यहां व्यक्ति का महत्व मामूली है। छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी वैचारिक प्रतिबद्धता से काम करते हुए पार्टी में बड़े दायित्व निर्वहन करने लगता है। यह संगठन की विशेषताए है।

अगले सत्र में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश के प्रभारी श्री विनय सहस्त्रबुद्धे ने कार्यकर्ताओं को सुशासन के बारे में विस्तृत रूप से समझाया। उन्होंने कहा कि सुशासन के 7 बिंदु है। जवाबदेही, पारदर्शिता, कानून का राज ,प्रतिसाद, न्याय तत्व, कार्यक्षमता और प्रतिभागात्मकता। उन्होंने कहा कि यह सुशासन शब्द सर्वप्रथम 90 के दशक में वर्ल्ड बैंक के द्वारा प्रस्तुत किया गया, लेकिन आज हम देखते हैं कि इसमें सारी वही बातें समाहित हैं जो दीनदयाल जी के एकात्म मानव दर्शन में बहुत स्पष्ट रूप से बताई गई हैं। जवाबदेही और पारदर्शिता जैसी बातें भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकारों का मूल मंत्र है। आज हम देखते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सहभागिता के साथ शासन चलाने के हामी हैं। वे मन की बात के जरिए निरंतर जनता से संवाद करते हैं ।इतना ही नहीं वह जनता से ही जानना चाहते हैं कि उन्हें क्या बात करनी चाहिए। यह जनतंत्र का असली स्वरूप है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान का लोगो किसी सरकारी अधिकारी ने नहीं बनाया बल्कि जनता के बीच से ही एक कलाकार ने देश को यह सौगात दी। यही हमारी पद्धति है। उन्होंने केंद्र सरकार सहित मध्य प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे भाजपा शासित राज्यों में जनहित में बनी योजनाओं की जानकारी भी प्रदेश कार्यसमिति को दी।

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने प्रशिक्षण वर्गों का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि मंडलों से शुरू हुई प्रशिक्षण की श्रृंखला राष्ट्रीय स्तर तक चलेगी। राष्ट्रीय स्तर पर छह अलग-अलग स्थानों पर आने वाले दिनों में प्रशिक्षण महा अभियान चलाया जाएगा। कुछ प्रशिक्षण विषय और श्रेणी के आधार पर भी दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि काम ऐसा हो कि उसकी तुलना उसी से की जा सके, किसी दूसरे से नहीं। जैसे आज एकात्म मानव दर्शन की तुलना किसी दूसरे से नहीं की जा सकती। जिस प्रकार पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा की तुलना किसी दूसरे से नहीं की जा सकती ठीक उसी प्रकार भारतीय जनता पार्टी अपने वैचारिक अधिष्ठान के कारण आज एक ऐसा राजनीतिक दल बनकर दुनिया के सामने है कि उसकी तुलना भी किसी दूसरे से करना संभव नहीं लगता। पार्टी की यात्रा में कर्तव्यनिष्ट कार्यकर्ताओं की एक लंबी श्रंखला का पसीना लगा है। इसलिए आने वाली पीढ़ियों को इसे इसी भाव के साथ आगे बढ़ाने के लिए अपनी कमर कस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें वैचारिक, भावनात्मक और अपनेपन के आधार  पर सदैव एक दूसरे का पोषक और पूरक बनना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर ने कहा इस देश में अनेक दल है। कोई व्यक्ति आधारित है कोई जाति आधारित है कोई धन बल से चलता है कोई बाहुबल से चलता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी एकमात्र ऐसा दल है जो सिद्धांत के आधार पर चलता है और कार्यकर्ता की सिद्धांतिक प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्गों की महती आवश्यकता है। आज हम देखते हैं कि दुनिया के तमाम राजनीतिक दलों की तुलना में हमारा कार्यकर्ता श्रेष्ठ है इसका एक मात्र कारण है कि हम विचार और सिद्धांत प्रधान पार्टी हैं। हमारी पंच निष्ठाएं हैं, हमारे पास एकात्म दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने सदैव राष्ट्र हित में निर्णय किए भले ही उसे पार्टी हित को थोड़ा पीछे रखना पड़ा। उन्होंने जेपी आंदोलन की चर्चा करते हुए कहा कि जय प्रकाश जी भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ रहे थे इसलिए वैचारिक रूप से विरोधी होने के बावजूद जनसंघ ने उनका साथ दिया और इंदिरा गांधी की सरकार को अपदस्थ किया, लेकिन जब जनता पार्टी की सरकार में कुछ लोगों को यह लगने लगा की जनसंघ से आए नेताओं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नहीं जाना चाहिए यह दोहरी सदस्ता नहीं चलेगी, तो हमारे पूर्वजों ने अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपने वैचारिक अधिष्ठान के प्रति संपूर्ण समर्पण जताते हुए विचार को चुना और सरकार को छोड़ दिया ।यही हमारी पार्टी का और हमारे कार्यकर्ताओं का आत्मबल है। हम 1980 के बाद की ही बात करें तो अटल जी, आडवाणी जी, जोशी जी, ठाकरे जी, वैंकेया जी और आज अमित शाह जी तक एक भी नेता ऐसा नहीं है जिसको विरासत में अध्यक्ष पद प्राप्त किया मिला। आज हम देखते हैं कि पार्टी का एक आम कार्यकर्ता भारत का सशक्त प्रधानमंत्री बना है। यह तासीर सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के पास है। वैचारिक द्रढता के कारण अटल जी ने अल्पमत की सरकार होने के बावजूद पोखरण परमाणु विस्फोट किया। क्योंकि भारत एक परमाणु संपन्न देश बने ,यह हमारा वैचारिक निर्णय था।

तोमर ने कार्यकर्ताओं से आवाहन किया कि वे श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार के ढाई साल के कार्यकाल का विस्तृत अध्ययन करें और उसे जन जन तक ले जाएं। आप देखेंगे कि देश के सर्वांगीण विकास के लिए मोदी सरकार दिन रात एक कर के नित नई योजनाएं बना रही है और क्रियान्वन कर रही है ।चाहे वह जन धन खातों की बात हो या फिर उज्जवला योजना हो, ऐसे तमाम कार्य सरकार ने किए हैं जिससे कार्यकर्ता का माथा गौरव से ऊंचा हो सकता है। नोट बदली के मामले पर उन्होंने कहा कि जिनके संकल्प में पवित्रता होती है वह ही ऐसे निर्णय ले पाते हैं ।प्रधानमंत्री बहुत स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उन्हें बहुमत सरकार चलाने के लिए नहीं, देश सुधारने के लिए मिला है ।इसलिए आतंकवाद काला धन और भ्रष्टाचार के विरोध में पूरी ताकत से जंग लड़ेंगे ।आज कार्यकर्ता को तय करना है कि जब सरकार इन सब चीजों के विरुद्ध जंग लड़ रही है तब कार्यकर्ता की भूमिका क्या हो। उन्होंने कहा कि आज पारदर्शिता की क्रांति का समय आ गया है। देश अब ना रुकेगा ना झुकेगा।

अंतिम सत्र में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नंदकुमार चैहान ने सहकारिता पर विस्तृत चर्चा करते हुए कार्यकर्ताओं को बताया की सामाजिकता और सहकारिता एक दूसरे के पूरक है भारत की विशेषता है पारिवारिक संबंधों और सामाजिक सरोकारों में विश्व में हम अग्रणीय हैं। आज बड़ी चिंता का विषय है कि दुनिया के कई देशों में पारिवारिक इकाइयां अवसान के कगार पर हैं जबकि भारत में विशेषकर भारत के गांव में आज भी संयुक्त परिवारों का मजबूत गठबंधन देखने को मिलता है। हमारे सामाजिक उत्सव समारोह देखें तो हम पाते हैं कि इन सब में सहकारिता का भाव ही समाया हुआ है। सहकारिता समाज की आर्थिक उन्नति का द्वार भी है। आज हम देखते हैं कि महाराष्ट्र गुजरात या फिर कर्नाटक हो यहां के आर्थिक विकास का ,आर्थिक समृद्धि का बड़ा कारण सहकारिता है। सहकारिता एक ऐसा माध्यम है जिससे आप समाज को साथ लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा निरंतर सब के सहयोग के साथ कर सकते हैं। इससे निश्चित तौर पर जो व्यक्ति नेतृत्व करता है उसे समाज में लोकप्रियता और सम्मान भी प्राप्त होता है उन्होंने कहा कि हमारे नेता नितिन गडकरी और स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे जी ने महाराष्ट्र की सहकारिता के क्षेत्र में जो योगदान दिया है मध्य प्रदेश के अपने कार्यकर्ताओं को उसका विस्तृत अध्ययन करके अपने प्रदेश में भी उसे लागू करने का प्रण लेना चाहिए

वर्गो की अध्यक्षता आलोक शर्मा, अशोक अर्गल, विजेश लुणावत, श्रीमती कृष्णा गौर, बीडी शर्मा, विनोद गोटिया, सुरेश देशपाण्डे, प्रदीप लारिया, सुदर्शन गुप्ता, श्री कृष्णमुरारी मोघे, जीतू जिराती आदि ने की।

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