21-May-2018

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बिरसा मुंडा के पराक्रम ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए- शिवराजसिंह चौहान

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कांग्रेस ने 50 वर्षों तक आदिवासियों के लिए कोई विकास नहीं किया

शहडोल। बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि शहीद बिरसा मुंडा के योगदान के बिना देश का स्वाधीनता संघर्ष का इतिहास अधूरा ही रहेगा। बिरसा मुंडा ने घोषणा की थी कि वे आजाद भारत में सांस लेंगे, अंग्रेजों का आधिपत्य कदापि भी स्वीकार नहीं करेंगे। उनके अदम्य साहस और पराक्रम ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये और इतिहास में आदिवासियों का स्वातंत्र्य प्रेम अंकित हो गया। बिरसा मुंडा ने राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित किया। आदिवासियों, गरीबों को शोषण मुक्त कराने और सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करनंे में भारतीय जनता पार्टी सरकार कोई कोर-कसर शेष नहीं रखेगी। उन्होंने यह बात शहडोल लोकसभा क्षेत्र के जैतपुर विधानसभा के अंतर्गत सिरोंजा ग्राम में कही। शिवराजसिंह चौहान ने उपस्थित जनसमुदाय को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में आदिवासियों को शोषण से मुक्ति मिलेगी और विकास की हर सुविधा दी जायेगी।

शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि आदिवासी अंचल वन-संपदा और रत्नगर्भा भूमि के कारण संपन्न है। फिर भी आजादी के 50 वर्ष तक कांगे्रस ने आदिवासियों को प्रगति के रास्ते पर लाने का कोई काम नहीं किया। केन्द्र में सत्तासीन हुई श्री अटलबिहारी वाजपेयी सरकार ने वन भूमि पर वनवासियों को आधिपत्य दिलाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया आरंभ की। वन भूमि अधिकार अधिनियम बनने के बाद मध्यप्रदेश में एक लाख 96 हजार आदिवासी, वनवासी और अन्य लोगों को 2006 तक के वन भूमि कब्जे के आधार पर वन भूमि का अधिकार-पत्र (पट्टा) दिया जा चुका है। बाजिव कब्जेदार को वनभूमि पर पट्टा मिलेगा, लेकिन हमें वनों को भी सुरक्षित रखना होगा। आदिवासी अच्छे प्रगतिशील कृषक बने, इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार उन्हें कृषि विकास, सिंचाई-कूंप कार्यो के लिए प्रचुरता से सहायता दे रही है। आदिवासी अंचल में महिलाओं और पुरूषों को स्वरोजगार के अवसर जुटाये जा रहे है। इस कार्य के लिए सकारात्मक मानसिकता की जरूरत है। लोकसभा उपचुनाव में भाजपा ने श्री ज्ञान सिंह को उनकी परिपक्वता, निपणुता, समाजसेवा और शासकीय राजनैतिक अनुभव को देखते हुए प्रत्याशी बनाया है। 19 नवंबर को हो रहे मतदान में उन्हें विजयी बनाकर आदिवासी अंचल को प्रगति के शिखर पर पहुंचानें में सहयोग दें। उन्होनें कहा कि कांगे्रस नेतृत्व विहीन पार्टी रह गयी है। कांगे्रस के पास विकास की कोई दृष्टि नहीं है। कांगे्रस का एकसूत्रीय कार्यक्रम विकास के कार्यों में अवरोध उत्पन्न करना रह गया है। उपचुनाव एक अवसर है, जब हम विकास की निरंतरता को अच्छे प्रत्याशी का चयन कर जारी रख सकते है। श्री ज्ञान सिंह श्रेष्ठ प्रतिनिधि सिद्ध होंगे। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आदिवासियांे, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े और गरीबों को 1 रू. किलों गेंहू, चावल और आयोडीन नमक देकर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है। प्रदेश में अन्न के अभाव में कोई भूखा नहीं सोयेगा। उन्होनें कहा कि किसान की खुशहाली से प्रदेश खुशहाल होता है, मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को जीरों प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देकर खुशहाली का मार्ग प्रशस्त किया है। प्रदेश में खाद-बीज के कर्ज पर अदायगी के समय 10 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है। एक लाख रू. का कर्ज लेने पर किसान को 90 हजार रू. ही चुकाना पड़ेंगे। भाजपा सरकार की उदार नीतियों, किसानोन्मुखी पहल का नतीजा है कि प्रदेश की विकास दर दस प्रतिशत और खेती की विकास दर 20 प्रतिशत दर्ज हो चुकी है, जो देश-विदेश में एक कीर्तिमान है।

उन्होनें कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि आदिवासियों के बच्चे, छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर कलेक्टर, पुलिस कप्तान, सैना के अधिकारी बनें, उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में तमाम सुविधाएं दी जा रही है। निःशुल्क पाठ्य-पुस्तके, दूर गांव जाने के लिए साईकिल की व्यवस्था की गयी है। पढ़ने-लिखने के बाद उन्हें उद्यमी और उद्योगपति बनानें के लिए सरकार ने कौशल-विकास के लिए प्रशिक्षण केन्द्र खोले है। हुनर हासिल करनें के बाद जो इच्छुक युवक-युवती उद्योग लगाना चाहेंगे, उसके लिए स्वरोजगार योजना में मदद और कर्ज दिया जायेगा, कर्ज की गारंटी मध्यप्रदेश सरकार लेगी। उन्होनें कहा कि भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देकर आदिवासी समुदाय और क्षेत्रीय विकास की दिशा में आगे बढ़े। आवश्यक है कि इस क्षेत्र को लोकसभा में उचित प्रतिनिधित्व मिले, जिससे क्षेत्र के विकास की गाड़ी आगे बढ़ सके। भाजपा प्रत्याशी ज्ञान सिंह इस क्षेत्र के जाने-माने परखे हुए नेता है, सहज और सुलभ है, प्रदेश सरकार से मदद लाकर विकास करनें में वे निपुण है, दिल्ली में पहुंचकर वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी आदिवासी अंचल में खुशहाली लाने के लिए पूरा सहयोग और मदद प्राप्त कर सकेंगे। 19 नवंबर को होने जा रहे मतदान में ज्ञान सिंह को विजयी बनानें के लिए कमल का बटन दबाकर क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करें। श्री ज्ञान सिंह इस क्षेत्र के पूर्व सांसद स्व. दलपत सिंह परस्ते के विकास के अधूरे सपनों को पूरा करनें में प्राण-पण से जुटेंगे। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं इस क्षेत्र के विकास के लिए भरपूर मदद और सहयोग के लिए तत्पर रहेंगे।

लोकमंथन से राष्ट्र सर्वोपरि की भावना सुदृढ़ होगी- चौहान

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेष अध्यक्ष एवं सांसद नंदकुमारसिंह चौहान ने भोपाल में आयोजित 3 दिवसीय लोक मंथन कार्यक्रम को राष्ट्र के विविध पक्षों का मंथन बताते हुए कहा कि मंथन से ही लोक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान परिस्थितियों में प्रतिभाशाली युवा, विचारकों, शोधार्थीयों और  राष्ट्र के विविध पक्षों का मंथन आवश्यक है। लोकमंथन ही राष्ट्र मंथन है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता से ओतप्रोत लोकमंथन में अपनी प्राचीन संस्कृति, संस्कार, रहन,सहन एवं राष्ट्रीय परंपराओं को और सुद्दढ़ करते हुए आगे बढ़ने पर विद्वानजनों की चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि अपने मूल संस्कारों को भूल जाएं और पश्चिमी परिवेश को अपनाकर विकास नही होता हम आगे तो बढ़ें परन्तु अपनी प्राचीन धरोहरों को लेकर मन में हीन भावना भी नहीं आने दें। राष्ट्र के विविध पक्षों को समाहित करते हुए तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय विमर्श में एक स्वर में पश्चिमी हवा को नहीं अपनाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने के लिए विभिन्न आयोजनों की श्रृखंला प्रारंभ की है। धर्म धम्म सम्मेलन, मूल्य आधारित जीवन, मानव कल्याण के धर्म, ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन, विज्ञान एवं अध्यात्म, महिला सशक्तिकरण, कृषि की ऋषि परंपरा, स्वच्छता एवं पवित्रता जैसे विषयों पर अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद एवं सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान वैचारिक महाकुंभ जैसे आयोजन मध्यप्रदेश सरकार ने किए है। लोकमंथन कार्यक्रम उसी कड़ी में एक कदम है।

उन्होंने कहा कि बौद्धिक सत्रों में औपनिवेशिक मानसिकता पर अनेक वक्ताओं ने तथ्यों के साथ भारत का पक्ष रखा और कहा कि भारत की नींव और भारत का इतिहास प्राचीन, समृद्ध और ऐतिहासिक है। पश्चिमी देश आज अपने अस्तित्व से लड़ रहे हैं। कई देश टूट चुके हैं, कुछ बिखर चुके हैं, इन हालातों में हमें अपनी प्राचीन संस्कृति की ओर निहारना होगा जो आज भी अडिग है। भारत की प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति का दुनिया में कोई मुकाबला नहीं। लोकमंथन के आयोजन से ‘‘राष्ट्र सर्वोपरि’’ की भावना मुखरित हुई।

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