22-Jul-2018

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बिना नंबर प्लेट वाले ट्रकों-डम्परों से नर्मदा में रेत का अवैध उत्खनन करने वाले कौन हैं..

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प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा एवं विधायक, महेन्द्रसिंह सिसोदिया ने गुरूवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान 11 दिसम्बर, 2016 से 05 मई, 2017 तक राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित 144 दिवसीय ‘‘नमामि देवी नर्मदे’’ यात्रा जारी किये हुए हैं, अपने 11 वर्षीय कार्यकाल में ‘‘माँ नर्मदा’’ को अपने परिजनों को बेशुमार संपत्ति उपार्जित करने का माध्यम बनाने वाले मुख्यमंत्री से कांग्रेस पार्टी प्रदेश के व्यापक हितों में यह जानना चाहती है कि चुनाव की नजदीकियों को दृष्टिगत रख उन्हें अब ‘‘माँ नर्मदा’’ की याद क्यों आई?

पार्टी ने मुख्यमंत्री पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा है कि गत् 01 दिसम्बर, 16 को मुख्यमंत्री की उपस्थिति में इस आयोजन को लेकर राजधानी के प्रशासनिक अकादमी में नर्मदा सेवा यात्रा-2016 की कार्ययोजना तय करने के लिए संपन्न राज्य-स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था कि ‘‘नर्मदा मध्यप्रदेश को जीवन देती है, इसके लिए नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि नर्मदा कि लिए अपने कर्तव्यों का पालन करें।’’ यह शब्द माँ नर्मदा के सम्मानार्थ तो स्तुत्य है, किन्तु मुख्यमंत्री जी के ही गृह जिले सीहोर, इटारसी, इछावर, नसरूल्लागंज, छीपानेर, शाहगंज, बुधनी, होशंगाबाद, आंबाजदीद, मंडी, सातदेव, सीलकंठ, नीलकंठ, बडगांव और डिमावर के तटीय रेत घाटों से प्रतिदिन 800 से 1000 ट्रक-डम्पर अवैध रूप से रेत का उत्खनन और परिवहन कर रहे हैैं। इनसे संबद्ध घाटों    पर 30 से 50 पोकलीन और जेसीबी मशीनें न केवल चल रही हैं, बल्कि 1200 नावें, 500 से अधिक हाईवा व ट्रक, इससे अधिक ट्रेक्टर-ट्राली और लगभग 3 से 4 हजार मजदूर इस अवैध कारोबार को अंजाम देते हुए निरंतर दिखाई दे रहे हैं। रेत माफियाओं ने रेत चोरी करने के लिए सीहोर जिले की सीमा जोशीपुर-जर्रापुर की ओर नर्मदा नदी पर 600 मीटर लंबा अस्थायी पुल भी बना दिया है। जहां से रात-दिन ट्रालिया-डम्परों की आवाजाही व यह भयावह आपराधिक दृश्य देखा जा सकता है। जीवन दायिनी ‘माँ नर्मदा’ के प्रति सम्मान दिये जाने की गुजारिश करने वाले मुख्यमंत्री जी क्या कृपापूर्वक यह भी बतायेंगे कि उक्त वर्णित राजनैतिक संरक्षण प्राप्त अपराध को रोकने की जिम्मेदारी भी किसकी है और राज्य सरकार ने इसे रोकने के लिए अपने किन और कौन से कर्तव्यों का पालन किया है? यही नहीं, मुख्यमंत्री जी यह भी सार्वजनिक करें कि माँ नर्मदा नदी से इस रेत के अवैध भंडारण, उत्खनन, परिवहन और कालाबाजारी करने वाला यह समूह आखिरकार कौन है?
 
आडंबर रचने में शिवराज सिंह चौहान को हासिल है महारथ, दें इस झूठ का जबाव

वैसे तो प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा 11 वर्षों में लगभग 11 हजार झूठी घोषणाऐं करने वाले ‘‘घोषणावीर मुख्यमंत्री’’ के रूप में ख्याति अर्जित कर हो चुके हैं। यह आरोप कांग्रेस का नहीं, अपितु इस आरोप की पुष्टि उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठतम भाजपा नेता व पूर्व राज्यसभा सदस्य श्री रघुनंदन शर्मा ने गत् वर्षों की थी। इन 11 वर्षों में विभिन्न लोकसभा, विधानसभा, नगरीय निकायों के संपन्न चुनावों / उपचुनावों में मुख्यमंत्री जी द्वारा उस क्षेत्र को स्मार्ट/ आदर्श बनाना, करोड़ों रूपयों के विकास कार्यों की झूठी घोषणाऐं करना, किसानों को खाद-बीज, फसल नुकसानी का मुआवजा, बीमा राशि, खेती को लाभ का धंधा बनाना, बेरोजगारों को रोजगार देने, स्कूल, कॉलेजों, स्टेडियमों, नलकूप, कुंआ, तालाब, स्टॉप डेम आदि के निर्माणों की थोथी घोषणा करना आम बात हो चुकी है, उसी श्रंृखला में प्रदेश के घोषणावीर मुख्यमंत्री जी का यह प्रामाणिक झूठ कांग्रेस के उक्त आरोपों को स्पष्ट कर रहा है। 

स्वास्थ्य मंत्री का सुनियोजित निरीक्षण, राजधानी सहित प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों के हालात बद से बदतर: विभा पटेल  

प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता श्रीमती विभा पटेल ने स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग, उसके अमले और राजधानी सहित प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों की दयनीय, गंभीर चिंताजनक स्थिति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह द्वारा किये गये जेपी अस्पताल के सुनियोजित निरीक्षण को हास्यास्पद बताते हुए कहा है कि क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और स्वास्थ्य मंत्री रूस्तमसिंह ने केवल राजधानी की हमीदिया और जेपी अस्पताल को ही क्यों चुना और यदि चुना भी तो क्या कारण है कि मंत्री जी के निरीक्षण की खबर पूरे अस्पताल प्रबंधन को लग गई, इसका सीधा तात्पर्य है कि उनके ही सिपहसालारों ने मंत्री जी के निरीक्षण की जानकारी अस्पताल तक पहुंचाई, जिससे पूरा अमला वहां मुस्तैद मिला और डॉक्टरों ने अपनी पीठ खुद थपथपा ली।

श्रीमती पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री हों या स्वास्थ्य मंत्री केवल राजधानी की अस्पतालों में ही निरीक्षण क्यों करते हैं, क्या उन्हें प्रदेश के जिला अस्पतालों की कोई सुध नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस जेपी अस्पताल में मरीज रोजाना डॉक्टरों के लिए तरसते हैं, मंत्री जी के दो निरीक्षण के दौरान अस्पताल में समय से पूर्व डॉक्टरों की उपस्थित के साथ सारी व्यवस्थाओं से लेस चकाचक रहा और जिसे देखकर मरीज भी हैरत में पड़ गये।

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र विदिशा में अजा-अजजा के विद्यार्थियों को पड़े खाने के लाले: रवि सक्सेना  

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रवि सक्सेना ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री लाख विकास का दावा करते हों, किन्तु सत्य यह है कि मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र विदिशा के अनुसूचित एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को राज्य सरकार ने गेहूं देना बंद कर दिया है, जिसके कारण विद्यार्थियों को रोटी नसीब नहीं हो रही है और विद्यार्थियों को भूखे रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है तथा हालात इतने बिगड़ गये हैं कि विद्यार्थी छात्रावासों से भागने पर विवश हो रहे हैं।

सक्सेना ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने मध्यप्रदेश में गेहूं का कोटा देना बंद कर दिया है, जिसके चलते राज्य की भाजपा सरकार छात्रावासों को गेहूं देने में उदासीन हो गई है। स्थिति यह है कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रावासों को एक रूपये किलो में प्रत्येक माह एक छात्र को बारह किलो गेहूं और चावल उपलब्ध कराती है पर नवम्बर 2016 से सरकार ने गेहूं देने पर रोक लगा दी है, जिससे बच्चे रोटी के अभाव में भूखे तक सोने को मजबूर हो रहे हैं और जिले के कलेक्टर से लेकर प्रदेश के आला अधिकारियों तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं, किन्तु मुख्यमंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद भी  सरकार कुंभकर्णी नींद सो रही हैं।

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